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Black Fungus: बाजार में दवा नहीं, अफसरों के पास जवाब नहीं, संकट में आई जिंदगी

इंदौर। ब्लैक फंगस की महामारी का भयावह रूप सामने आ रहा है। बाजार से एम्फोटेरेसिन-बी दवा गायब है। जिम्मेदार अफसरों के पास जवाब नहीं है कि दवा कहां और कैसे मिल पाएगी। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के पास इतना वक्त नहीं है कि वे इंतजार कर पाएं। प्रोटोकाल के हिसाब से इंदौर में ब्लैक फंगस के मरीजों को एम्फोटेरेसिन-बी के रोज 10 हजार वायल चाहिए, लेकिन सिर्फ 100-200 वायल ही आ रहे हैं। कभी यह भी नहीं मिल पा रहे हैं।

आधी-अधूरी खुराक बेअसर

ब्लैक फंगस के मरीज को 21 से 45 दिन तक एम्फोटेरेसिन-बी के इंजेक्शन लगते हैं। मरीज का डोज उसके शरीर के वजन के आधार पर तय किया जाता है। यदि मरीजों का औसत वजन 50-60 किलो माना जाए तो तय अवधि में 200 वायल लगते हैं, पर हकीकत है कि अधिकांश मरीजों को तय डोज हर मिल रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज के डोज में एक-दो दिन का गेप हो जाए तो पहले लगाए गए इंजेक्शन का कोई असर नहीं होता। मरीज उसी स्थिति में आ जाता है, जहां वह डोज के पहले दिन था।

समिति सुस्त : दवा के घोर संकट में शासन और प्रशासन को कुछ तो काम करना था, सो एक समिति बना दी। डाक्टरों की समिति की सिफारिश पर मरीज के लिए दवा मिलेगी। पर अफसोस की बात है कि सारे दस्तावेजों के साथ आवेदन देने पर भी समिति दवा की सिफारिश नहीं कर रही है। सिफारिश कर भी दी तो मेडिकल स्टोर पर दवा उपलब्ध नहीं है।

तर्क : एम्फोटेरेसिन-बी की मांग ज्यादा होने से अनुमति नहीं दी जा रही। कभीकभी स्टाकिस्ट भी दवा नहीं दे पा रहे।

दवा की किल्लत : एमवाय व प्रमुख निजी अस्पतालों में एक हजार से अधिक मरीज भर्ती हैं। ब्लैक फंग के इलाज के लिए एंटी फंगल दवा एम्फोटेरेसिन-बी ही कारगर है। पर इंदौर ही नहीं देश-प्रदेश में इस दवा की भारी किल्लत है।

परेशानी : वक्त पर दवा नहीं मिलने से लगातार संक्रमितों में बढ़ोतरी हो रही।

रणीनीति फेल : कमिश्नर डा. पवन शर्मा ने निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को एम्फोटेरेसिन-बी उपलब्ध कराने के लिए एक समिति बनाई है। समिति में एमजीएम मेडिकल कालेज के डीन और ईएनटी विभाग के प्रमुख है। यह समिति मरीज की क्लीनिकल स्थिति का मूल्यांकन कर तय करती है कि उसे एम्फोटेरेसिन-बी दिया जाना है या नहीं। जिन्हें इंजेक्शन देना जरूरी है, उसके संबंधित अस्पताल को इंजेक्शन का रिलीज आर्डर जारी किया जाता है।

हालात : मरीजों को वक्त पर इंजेक्शन नहीं मिल रहे, जिससे हालत बिगड़ रही।

एम्फोटेरेसिन-बी का संकट है। मांग हजारों में है, लेकिन 100 तो किसी दिन 200 वायल ही मिल पा रहे हैं। हमारी समिति तब तक इस इंजेक्शन का रिलीज आर्डर नहीं दे सकती, जब तक प्रशासन की ओर से यह निर्देश नहीं मिल जाए कि अधिकृत स्टाकिस्ट के पास दवा उपलब्ध है। – डा. संजय दीक्षित, डीन, एमजीएम मेडिकल कालेज