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मप्र में शिथिल पड़ा मानसून, तेज बौछारें पड़ने के आसार नहीं, बढ़ेगी उमस

भोपाल। मध्य प्रदेश में दो दिन पहले दक्षिण-पश्चिम मानसून छा चुका है, लेकिन प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में अपेक्षित बरसात नहीं हो रही है। मौसम विज्ञानियों के मुताबिक वर्तमान में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में कोई प्रभावी वेदर सिस्टम मौजूद नहीं है। इस वजह से मानसून प्रदेश में शिथिल पड़ गया है। हालांकि वातावरण में कुछ नमी बरकरार रहने के कारण कहीं-कहीं दोपहर के बाद गरज-चमक के साथ हल्‍की बौछारें पड़ जाती हैं। उधर पिछले 24 घंटों के दौरान सतना में 39, शाजापुर में 4, खंडवा में 3, उज्जैन में 2 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। गुना और दतिया में भी बूंदाबांदी हुई।
मौसम विज्ञान केंद्र के विज्ञानी पीके साहा ने बताया कि नमी कम होने के कारण आसमान साफ होने लगा है। इससे धूप निकलते लगी है और अधिकतम तापमान बढ़ने लगा है। इस वजह से सोमवार को राजधानी का अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जो सामान्य से दो डिग्री कम है। हालांकि यह रविवार के अधिकतम तापमान (31.6 डिग्री सेल्‍सियस) की तुलना में 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। साहा ने बताया कि वर्तमान में मानसून ट्रफ भी उत्तरी पंजाब से हरियाणा, उत्तरप्रदेश, बिहार से होकर बंगाल की खाड़ी पर बना हुआ है। मानसून ट्रफ के काफी ऊंचाई की तरफ खिसक जाने के कारण भी मध्य प्रदेश में बरसात नहीं हो रही है।
मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व वरिष्ठ विज्ञानी अजय शुक्ला ने बताया कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में अभी कोई वेदर सिस्टम मौजूद
नहीं है। इस वजह से मानसून को आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल रही है। इस कारण से मानसून शिथिल बना हुआ है। 24-25 जून को बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने के संकेत मिले हैं। इस सिस्टम के आगे बढ़ने से मानसून को ऊर्जा मिलने की संभावना है। इसके बाद प्रदेश में मानसून के फिर सक्रिय होने के आसार हैं।