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छत्तीसगढ़ की पहली महिला आइएएस की सफलता की कहानी पढ़कर आप भी हो जाएंगे मुरीद

रायपुर। अब बात होगी छत्तीसगढ़ क एक ऐसी मातृ शक्ति की, जिसे छत्तीसगढ़ की पहली महिला आइएस होने का गौरव प्राप्त है। वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र ऐसी महिला अधिकारी हैं, जो अब तक चार जिलों की कलेक्टर रह चुकी हैं। इस बेटी के कोरोना संक्रमण रोकने के माॅडल को पूरा प्रदेश अपना रहा है। जी हां हम बात कर रहें हैं, कोरबा की कलेक्टर किरण कौशल की।

कोरबा की कलेक्टर किरण कौशल, जिनके नाम पृथक छत्तीसगढ़ की पहली महिला आइएस होने का गौरव प्राप्त है। किरण अब तक चार जिलों की कलेक्टर रही, जहां-जहां वह पदस्थापित रही, वहां उनकी प्रशासनिक कौशल की छाप नजर आई। मुंगेली को प्रदेश का पहला ओडीएफ जिला बनाना हो, सरगुजा को स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना हो या फिर सतरेंगा को विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने का श्रेय, कलेक्टर किरण कौशल को ही जाता है।

एक महिला अधिकारी के तौर पर किरण कौशल ने जनहित के कामों को हमेशा अपनी प्राथमिकता में रखा। कोरोना काल के दौरान जब छत्तीसगढ़ के पहले हॉट स्पॉट कटघोरा में अपनी रणनीति कौशल का परिचय देते हुए संक्रमण के चेन को तोड़ा। जिसके बाद कई जगह कटघोरा मॉडल को अपनाया गया। दुर्ग जिले में कौशल परिवार में जन्मी पली-बढ़ी किरण बचपन से ही मेधावी रहीं हैं।

आपने राज्य स्तर की सबसे बड़ी प्रशासनिक सेवा परीक्षा के साथ-साथ अखिल भारतीय स्तर की भी सबसे कठिन परीक्षा उत्तीर्ण की है। 2003 और 2005 में दो बार राज्य की पीएससी परीक्षा पास की। वे 2003 में जिला महिला बाल विकास अधिकारी और 2005 में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयनित हुईं। परंतु उनका पैशन तो कलेक्टर बनने का था, तो किरण ने कड़ी मेहनत कर 2009 में यूपीएससी की परीक्षा क्रैक की और छत्तीसगढ़ की पहली महिला आईएएस होने का गौरव प्राप्त किया।

वे रायपुर, अंबिकापुर में जिला पंचायत की सीईओ रहीं और सबसे पहले मुंगेली, फिर सरगुजा, बालोद और कोरबा की कलेक्टर बनीं। सभी जिलों में अपनी पदस्थापना के दौरान किरण कौशल ने अपनी प्रशासनिक क्षमता और काम की छाप छोड़ी है। मुंगेली जिले को प्रदेश का पहला ओडीएफ जिला बनाना हो या सरगुजा को स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना हो।

बालोद में शांतिपूर्ण चुनाव से लेकर कोरबा में सड़कों की मरम्मत, महिलाओं और छात्राओं के स्वास्थ्य और पोषण की योजनाएं शुरू करने के काम। किरण कौशल के नाम दर्ज हैं। सतरेंगा को विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने का श्रेय भी कलेक्टर किरण को ही जाता है। कोरोना काल में जब छत्तीसगढ़ के पहले हाॅट स्पाॅट कटघोरा ने पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींचा तो इसके साथ ही किरण कौशल की रणनीति के भी सभी मुरीद हो गए

कोरोना काल में संक्रमितों की जल्द पहचान करने से लेकर उनके इलाज, लाॅकडाउन लगाने से लेकर उसका सख्ती से पालन करना और इस सब के बाद भी लोगों को दैनिक जरूरत की चीजों की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति बनाए रखने के लिए किरण कौशल की योजना और रणनीति ने दूसरे जिलों को भी कोरोना से लड़ना सिखाया। एक बेटी, बहु, मां और पत्नी के साथ अपनी पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का सफलता पूर्वक निर्वहन करते हुए जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने।

जनहित के कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करते हुए किरण आज भी कलेक्टर के रूप में सक्रिय हैं। सड़कों के निर्माण के लिए सघन दौरा, ग्रामीण इलाकों में लोगों की परेशानियां जानने शिविरों का आयोजन, शहरी इलाकों में महा सफाई अभियान, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और सेहत के लिए किए कामों से किरण ने अपनी एक अलग पहचान बनी ली है। जिला वासियों के बीच जाकर उनकी समस्याओं का समाधान करने और जनप्रतिनिधियों से सद्व्यवहार ने भी किरण को जिले में तेज तर्रार काम करने वाली कलेक्टर के रूप में स्थापित किया है।