छत्तीसगढ़ सरकार के हमारे नायक कॉलम में रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी एएन बंजारा को मिली जगह

रायपुर। कोरोना महामारी के कारण वर्तमान में अभी भी कुछ स्कूल बंद हैं, लेकिन विभिन्न माध्यमों से पढ़ाई जारी है। स्कूल शिक्षा विभाग के पढ़ई तुंहर दुआर वेब पोर्टल पर हमारे नायक के रूप में रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी अशोक नारायण बंजारा कुछ चयनित किया गया है, जिन्होंने रायपुर में आमाराइट प्रायोजना की नींव रखी और सभी शिक्षकों के माध्यम से पूरे जिले में लागू करवाया। इस ग्रीष्मावकाश में जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर ने बच्चों को सक्रिय रखने के लिए ग्रीष्मकालीन प्रायोजना आमाराइट कक्षावार प्रारंभ की है।

इस प्रायोजना में 30 जून तक शिक्षकों के ऑनलाइन मार्गदर्शन पर विद्यार्थियों ने प्रोजेक्ट फाइल तैयार कर स्कूलों में जमा करना था। यह नवाचार समस्त शालाओं एवं विद्यार्थियों तक पहुंचे, इसके लिए विकासखंड स्तर एवं संकुल स्तर पर वर्चुअल मीटिंग का आयोजन किया गया। वहीं, विद्यार्थी प्रोजेक्ट फाइल तैयार कर शाला खुलने पर स्कूल में जमा करेंगे। शाला स्तर पर इनका मूल्यांकन किया गया, जिसमें ए, बी एवं सी श्रेणी प्रदान कर अगले सत्र के अंतिम आंतरिक मूल्यांकन पर अंकसूची/प्रगति पत्रक में भी इसे अंकित भी किया गया।

इस प्रयोजना कार्य की मॉनिटरिंग जिला, विकासखंड एवं संकुल स्तर पर वेबिनार के माध्यम से संकुल प्राचार्य, प्रधानपाठक, पीएलसी सदस्य एवं संकुल समन्वयकों की जा रही है। जूनून की बहुत जरुरत होती है, बिना सच्ची धुन के आप कामयाब नहीं हो पाएंगे। आपका जूनून ही आपको आपके लक्ष्य की तरफ धकेलता है, जूनून ही आपके मन में ऊर्जा भर देता है, जिससे आप लगातार अपने कार्य क्षेत्र में मेहनत करते रहतें हैं। बिना जूनून के आपमें अपने कार्य के प्रति सच्चा उत्साह पैदा नहीं हो पाता है और आप उस कार्य को सामान्य तरीके से करते रहते हैं और कभी सफल नहीं हो पाते।

अगर आप अपने जीवन का लक्ष्य तय नहीं कर पा रहे हैं, तो कोई चिंता की बात नहीं। चैन से बैठिये और उन चीजों के बारे में सोचिये जो आपको उत्साहित करती हैं। अपने अंदर उन्हीं चीजों की धुन को बढाइये और आपको अपने जीवन का लक्ष्य मिल जाएगा। कोरोना महामारी के कारण पूरे स्कूल बंद हो चुके थे, ऐसे में शासन के द्वारा पढ़ई तुंहर दुआर के cgschool. in पोर्टल के माध्यम से छत्तीसगढ़ के बच्चों को शिक्षा देने की योजना बनाई। ऐसे में जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर अशोक नारायण बंजारा ने अपने जिले में आमाराइट प्रायोजना की नींव रखी और पूरे जिले में इसको लागू करवा के बच्चों में शिक्षा की क्रांति की अलख जलाई।

छत्तीसगढ़ शासन ने शिक्षा के लिए एएन बंजारा के काम को देखते हुए उन्हें राजधानी के लिए डीईओ बनाया है। इनके द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किये गए नवाचार की गूंज केंद्र सरकार तक पहुंच चुकी है। अशोक नारायण बंजारा जिला शिक्षा अधिकारी को स्कूली शिक्षा के सेनापति के रूप में बोला जाता है और उनके काम करने की शैली के कारण उन्हें अवार्ड मिल चुका है। जब देश भर में जब डिजिटल इंडिया के तहत नवाचार की बात चल रही थी, तब शिक्षा के लिए नवाचार की गाथा वे पहले ही गढ़ चुके थे।

स्मार्ट स्कूल, जन सहयोग का साइंस सेंटर, टेलीफोनिक मानिटरिंग सिस्टम, हमन-36, परख और मड़ई मेला जैसे नए कान्सेप्ट पर काम कर सात मार्च 2017 को उन्हें बेस्ट इनोवेशन एंड एडमिनिस्ट्रेशन का अवार्ड हासिल किया था। यह अवार्ड दिल्ली में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अशोक नारायण बंजारा को दिया था। रायपुर में गरीब बच्चों के लिए निःशुल्क सुपर-30 की तर्ज पर हमन-36 संचालित करवा चुके हैं, जिसमें बच्चें आईआईटी और नीट की तैयारी मुफ्त में कर रहे हैं।

बहुत से बच्चे उच्च शिक्षण संस्थानों तक दाखिल भी हो चुके हैं। डीईओ बंजारा ने दुर्ग में डीईओ रहते हुए स्मार्ट क्लास, जन सहयोग से साइंस सेंटर और बालिका मिनी थियेटर बनाया। बंजारा साहित्य में भी अच्छी पकड़ रखते हैं। उनका नाम साहित्यकारों में भी शामिल हैं। स्कूल से प्रेम इतना कि इन्होंने मेरा प्यारा स्कूल जैसे पचरंगा फूल कविता लिखी है, जिसे स्कूलों में बच्चे गाते हैं। इनके द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2021 के अनुरूप नवाचारी सहज क्रियाकलाप आमाराइट-प्रोजेक्ट की संकल्पना तथा इसके लिए प्रश्न पत्रों का निर्माण किया।

इन कामों के कारण हमारे नायक में चयन

1- बच्चों को छत्तीसगढ़ की कला व संस्कृति से परिचित होने जिज्ञासा उत्पन्न करना।

2- पर्यावरण संवर्धन, संरक्षण व स्वच्छता के लिए जागरुक व प्रोत्साहित करना।

3 – बच्चों मे कला व कौशल विकास के लिए प्रेरित करना।

4 – कोविड-19,से बचाव, टीकाकरण जागरूकता।

5 – आमाराइट प्रश्न पत्र वितरण एव जानकारी हेतु बच्चों व पालको से सम्पर्क।

6 – आमाराइट की जानकारी के लिए PLC के माध्यम से जिला व विकास खंड स्तर पर विकासखंड शिक्षाधिकारियों, प्राचार्यों, शिक्षको को वेबिनार के माध्यम से मार्गदर्शन।

7 – आमाराइट प्रोजेक्ट प्रश्नों को समझाने हेतु विद्यार्थियों व पालकों के लिए आनलाइन क्लास।

8 – राज्य स्तर पर इस प्रोजेक्ट को लागू करने हेतु प्रयास व उन्मुखीकरण कार्यक्रम संपादन।

9 – आमाराइट प्रोजेक्ट की गतिविधि अवलोकन के लिए वि ख स्तर पर डीईओ, बीईओ प्राचार्य शिक्षकों विद्यार्थियों का व्हाट्सएप ग्रुप निर्माण कर नवाचार को प्रोत्साहित करना, प्रोजेक्ट कार्य व मोहल्ला क्लास मे सतत मानिटरिंग।

10 – आमाराइट प्रोजेक्ट प्रणेता के रूप मे आमाराइट प्रोजेक्ट-पार्ट-2 के लिए कार्य योजना निर्माण।

11 – इसके अलावा डीईओ के रुप मे पूर्व मे नवाचार प्रोजेक्ट- हमन- 36, कैरियर मार्गदर्शन वृहत पत्रिका निर्माण, टी एल एम निर्माण के लिए शिक्षकों को प्रोत्साहन।