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कुलदीप के माेबाइल की सारी रिकार्डिंग सुरक्षित, बस फायर आफिसर से हुई बातचीत का रिकार्ड गायब

ग्वालियर। हायड्रोलिक प्लेटफार्म मशीन हादसे से एक दिन पहले रात को 10:30 बजे फायर आफिसर और निगमकर्मी कुलदीप डंडौतिया के बीच हुई एक मिनट 45 सेकंड की बातचीत की रिकार्डिंग गायब है। कुलदीप ने अपने मोबाइल पर फायर अमले से जुड़े कुछ लोगों के काल को आटो काल रिकार्डिंग पर सेट कर रखा था। कुलदीप के भाई ने हादसे के एक दिन पहले रात में किस-किससे बात हुई, यह जांचा तो पता चला कि सबकी रिकार्डिंग हुई, लेकिन जो बात फायर आफिसर अब निलंबित उमंग प्रधान से हुई,वह काल रिकार्डिंग गायब है। कुलदीप के भाई ने इसकी जांच की मांग की है। बुधवार को कुलदीप के परिवार ने नगर निगम उपायुक्त आरके श्रीवास्तव से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान कहा कि प्रभारी मंत्री और कलेक्टर ने स्थाई नौकरी का वादा किया था,अब निगम अस्थाई नौकरी की बात कर रहा है। परिवार ने प्रस्ताव ठुकरा दिया। कुलदीप के भाई ने बताया कि निगम का अमला प्रदीप राजौरिया के घर अस्थाई नौकरी का प्रस्ताव लेकर पहुंचा और यह कहा कि कुलदीप के परिवार ने अस्थाई नौकरी पर सहमति दे दी है,जो झूठ है। वहीं इस मामले में जांच अधिकारी सीइओ जिला पंचायत ने जांच शुरू कर दी है।

ऐसे हुआ था हादसाः 14 अगस्त को नगर निगम के कर्मचारी कुलदीप डंडौतिया, प्रदीप राजौरिया और विनोद शर्मा को हायड्रोलिक प्लेटफार्म से महाराज बाड़ा स्थित डाकघर की इमारत पर 15 अगस्त के लिए झंडा बदलने के लिए बुलाया था। तीनों मशीन की ट्राली पर खड़े थे और हायड्रोलिक का जैक टूटने से ट्राली नीचे आ गिरी। हादसे में तीनों की मौत हो गई। इस मामले में प्रभारी मंत्री सहित अफसर मौके पर पहुंच गए थे और आक्रोशित लोगों ने चक्काजाम भी किया। इस मामले में जांच के आदेश हुए और फायर आफिसर उमंग प्रधान को निलंबित कर उनके खिलाफ व ड्रायवर पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया।

मांगे साक्ष्य: 6 सितंबर को कलेक्ट्रेट में कोई भी दे सकता हैः महाराज बाड़ा पर हुए क्रेन हादसे की जांच जिला पंचायत सीइओ किशोर कान्याल ने शुरू कर दी है। सीइओ ने सभी शासकीय एवं अशासकीय लोगों से इस मामले की वीडियो क्लीपिंग, कथन आदि मांगे हैं। इस हादसे की जांच के लिए लोग वीडियो क्लीपिंग एवं साक्ष्य 6 सितंबर की दोपहर 2 से 6 बजे तक नवीन कलेक्ट्रेट भवन के कक्ष क्रमांक 104 में दे सकता है। इस हादसे की प्रशासनिक जांच पहले अपर कलेक्टर आशीष तिवारी को सौंपी थी, लेकिन बाद में उन्हें निगमायुक्त का प्रभार दे दिया गया। इसके कारण वह जांच नहीं कर पाए। बाद में प्रभारी मंत्री ने बैठक में जांच के बारे में पूछा तो सारा मामला उनके संज्ञान में लाया गया। इसके बाद उन्होंने सीइओ जिला पंचायत को इस मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया। बुधवार को कलेक्टर की ओर से उन्हें जांच के लिए पत्र दिया गया। इसके बाद गुरुवार को सीइओ ने जांच के लिए लोगों के साक्ष्य, बयान और वीडियो क्लीपिंग आदि मांगे हैं।