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लंबित मांगों से नाराजगी बढ़ी तो संयुक्त मोर्चा बना रहा विरोध की रणनीति

भोपाल। महंगाई भत्ता नहीं मिलने जैसी दो दर्जन मांगों से नाराज कर्मचारी जल्द ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। कर्मचारियों ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। शनिवार दोपहर 12 बजे से राजधानी के कर्मचारी भवन में बैठक बुलाई है जो चालू हो चुकी है। इसमें प्रदेश भर के कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं। यह बैठक मप्र अधिकारी कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में हो रही है। बैठक में महंगाई भत्ता का लाभ लेने, पदोन्न्ति देने, लिपिकों की वेतन विसंगति संबंधी मांगों को सुलझाने, संविदाकर्मियों को नियमित किए जाने, स्थायी कर्मियों को अकुशल, अर्धकुशल व कुशल से हटाकर नियमित कर्मचारियों की तरह सेवाएं देने, संविदा स्वास्थ्य कर्मियों, संविदा इंजीनियरों को नियमित करने जैसी मांगों पर चर्चा की जा रही है। चर्चा से सरकार को अवगत कराया जाएगा। उसके बाद भी मांगें पूरी नहीं होती है तो विरोध दर्ज कराया जाएगा। इसकी रणनीति भी बैठक में ही तय की जाएगी।

संयुक्त मोर्चा के महेंद्र शर्मा ने बताया कि बैठक में 30 से अधिक कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया है। सबसे पहले बढ़ती महंगाई के बावजूद भी महंगाई भत्ते का लाभ नहीं मिलने पर चर्चा कर रहे हैं। यह बड़ा विषय है। इससे प्रत्येक कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य प्रभावित है। महेंद्र शर्मा ने बताया कि केंद्र के कर्मचारियों को इसी कोरोना संक्रमण के दौरान महंगाई भत्ते का लाभ दिया है जो बढ़कर 28 फीसद हो गया है जबकि राज्य सरकार कोरोना संक्रमण की आड़ ले रही है और इसके कारण महंगाई भत्ता 12 फीसद ही है। घर से दफ्तर आने-जाने का किराया ही जान निकाल रहा है।

मोर्चा के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने बताया कि कर्मचारियों का समय-समय पर करोड़ों रुपये एरियर रोका गया है जिसका भुगतान अभी तक नही किया है। इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे और जो बात निकलकर आाएगी, उससे सरकार को अवगत कराएंगे।मोर्चा के संरक्षक भुवनेश कुमार पटेल ने बताया कि संविदाकर्मियों के साथ पूर्व की तुलना में शोषण बढ़ा है। सालों से काम करने वाले संविदाकर्मियों को अब तक नियमित नहीं किया है, सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। इस विषय पर मोर्चा लगातार चर्चा कर रहा है। पुन: सरकार को संविदाकर्मियों की स्थितियों से अवगत कराएंगे

मोर्चा में शामिल ओपी कटियार ने बताया कि वेतन विसंगति एक बड़ी समस्या रही है, जो समय-समय पर बढ़ती ही गई है। कुछ ही मामलों में निराकरण हुआ है। कर्मचारियों को इस तरह नुकसान भुगतना पड़ता है। इस बात से सरकार को अवगत कराएंगे।

संयोजक एसबी सिंह ने कहा कि स्थायी कर्मियों की दुर्दशा बढ़ती ही जा रही है। वे 20 साल से लगातार काम कर रहे हैं। इनमें से हजारों की मौत हो चुकी है। उनका परिवार परेशान है। कोई मदद नहीं मिल रही है। सरकार को कहेंगे कि इस गंभीर समस्या पर ध्यान दें। बैठक में अन्य कर्मचारी प्रतिनिधि भी शामिल है जो प्रत्येक संवर्ग से जुड़ी समस्याओं पर शाम तक चर्चा करेंगे।