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क्षेत्रीय संचालक अचानक पहुंचे एल्गिन अस्पताल, व्यवस्था हुई दुरुस्त

जबलपुर। ग्लब्स-मास्क व पीपीई किट पहने स्वास्थ्य कर्मचारी, गर्भवती महिलाओं को कतार में खड़े रहने से छुटकारा, जैव अपशिष्ट का सही तरीके से भंडारण…। यह बदलाव नजर आया रानी दुर्गावती चिकित्सालय एल्गिन में जहां वार्ड के भीतर अथवा बाहर गंदगी नजर आते ही कर्मचारी सफाई व्यवस्था में जुट जाते हैं। क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य डा. संजय मिश्रा ने एल्गिन अस्पताल का औचक निरीक्षण किया तो उक्त व्यवस्थाएं साफ नजर आईं। मरीजों व हेल्थ वर्कर्स की सुरक्षा में बरती जा रही लापरवाही के संबंध में ’नईदुनिया’ के अभियान को गंभीरता से लेते हुए डा. मिश्रा ने अस्पतालों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि नईदुनिया ने जिस तरह कमियों को उजागर किया उससे अस्पताल में व्यवस्थाएं और दुरुस्त हुई हैं। मरीजों की सेहत की रक्षा अस्पताल की जिम्मेदारी है। उनकी सेहत से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रसूति कक्ष में सफाई पर जोर: प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी शिशु एवं मातृत्व कल्याण इकाई का दर्जा प्राप्त एल्गिन अस्पताल में प्रसूति कक्ष की सफाई व्यवस्था पर जोर दिया गया है। पूर्व से सूचना दिए बगैर एल्गिन पहुंचे क्षेत्रीय संचालक ने सबसे पहले प्रसूति कक्ष की व्यवस्थाएं देखीं। प्रसूति कक्ष में गर्भवती महिला की सेहत पर नजर रखी जा रही थी। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ ग्लब्स, मास्क व पीपीई किट में नजर आया। डा. मिश्रा ने कहा कि अस्पताल परिसर में मरीज के प्रवेश करते ही उसकी संपूर्ण सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रबंधन की रहती है। मरीजों से हेल्थ वर्कर्स व हेल्थ वर्कर्स से मरीजों को किसी भी तरह का संक्रमण न होने पाए। नर्सिंग स्टाफ ने बताया कि प्रसूति कक्ष को संक्रमण रहित रखने के लिए समय-समय पर सफाई की जाती है। मरीज को छूने से पहले चिकित्सक व कर्मचारी सुरक्षा के निर्धारित प्रोटोकाल का पालन करते हैं। मरीज के स्वजन द्वारा प्रसूति कक्ष के सामने फेंके गए खाद्य पदार्थ की सफाई डा. मिश्रा ने अपने सामने कराई।

निडिल कटर रखवाए, जैविक कचरे का प्रबंधन: जैव अपशिष्ट के निष्पादन पर जोर दिया जा रहा है। एल्गिन अस्पताल के वार्डों में निडिल कटर रखवाए गए हैं। निर्धारित डस्टबिन में जैव अपशिष्ट का भंडारण किया जाता है। डा. मिश्रा ने कहा कि अस्पताल से निकलने वाले जैविक कचरे के निष्पादन के लिए सरकार द्वारा गाइड लाइन तय की गई है। मरीजों को इंजेक्शन लगाने के बाद सीरिंज काे निडिल कटर से काट देना चाहिए ताकि उसका दोबारा उपयोग न होने पाए। डा. मिश्रा ने कहा कि उन्होंने निर्देश दिया है कि सभी अस्पतालों में निडिल कटर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। डा. मिश्रा ने वार्डाें का भी जायजा लिया। जहां स्वास्थ्य कर्मचारी सुरक्षा उपायों के साथ ड्यूटी पर मौजूद मिले। उन्होंने अस्पताल का कोना-कोना देखा और व्यवस्थाओं पर संतोष जताया

ब्लड स्टोरेज इकाईयां प्रारंभ करने के निर्देश: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बरेला में प्रसव उपरांत प्रसूता को खून चढ़वाने के लिए एल्गिन अस्पताल रेफर कर दिया गया था। जिससे प्रसूता व उसके स्वजन को परेशानी का सामना करना पड़ा। नईदुनिया ने उक्त समस्या को प्रमुखता से उजागर किया था। क्षेत्रीय संचालक डा. मिश्रा ने निर्देश जारी किया है कि समस्त प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ब्लड स्टोरेज इकाईयों को प्रारंभ किया जाए। ताकि प्रसूता अथवा गर्भवती महिलाओं को खून चढ़वाने के लिए दर-दर भटकना न पड़े।

स्ट्रेचर चलाते नजर न आएं स्वजन: एल्गिन अस्पताल पहुंचे डा. मिश्रा के सामने स्वास्थ्य कर्मचारी मरीजों का स्ट्रेचर व व्हीलचेयर चलाते मिले। उन्होंने अस्पताल में पदस्थ चतुर्थ वर्ग व ठेका कर्मचारियों की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि अस्पताल पहुंचे किसी भी मरीज को मूलभूत सुविधाओं से वंचित न होना पड़े। व्हीलचेयर व स्ट्रेचर चलाने की जिम्मेदारी से बचने वाले कर्मचारियों पर ठोस कार्रवाई की जाए।

एसएनसीयू में 600 ग्राम के शिशु का उपचार: अस्पताल के एसएनसीयू में समय से पूर्व लिए 600 ग्राम वजन के नवजात शिशु की जान बचाने की कोशिश में चिकित्सक व कर्मचारी जुटे रहे। उन्होंने डा. मिश्रा को बताया कि गोहलपुर निवासी आफरीन ने शुक्रवार को शिशु को जन्म दिया था। सातवें माह हुए प्रसव के कारण शिशु शारीरिक रूप से कमजोर है। 20 बिस्तरीय एसएनसीयू में 40 से ज्यादा शिशुओं का उपचार किया जा रहा था।

सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा में बरती जा रही लापरवाही पर नईदुनिया ने ध्यान आकृष्ट कराया था। जिसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए थे। एल्गिन अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया। जहां व्यवस्थाएं दुरुस्त मिलीं।

डा. संजय मिश्रा, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं

जबलपुर संभाग