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ट्रेन से पहुंच रहा वायरस, स्वास्थ्यकर्मी बेबस

बिलासपुर। शहर में ट्रेन के जरिए कोरोना वायरस दस्तक दे रहा है। दरअसल महाराष्ट्र के सभी कुछ राज्यों में बढ़ती संक्रमितों की संख्या को देखते हुए रेलवे स्टेशन में स्वास्थ्य विभाग ने जांच का निर्णय लिया है। इसके लिए बूथ बनाकर तीन से चार स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। लेकिन यात्रियों को रोककर जांच करा पाना कर्मचारियों के बस से बाहर है।

स्वास्थ्य अमला गेट क्रमांक चार पर तैनात है। यह व्यवस्था करीब सप्ताहभर से की गई है ताकि जब ट्रेन से उतरकर यात्री बाहर निकले तो उनकी इस गेट पर जांच हो सके, लेकिन हकीकत कुछ अलग है। स्वास्थ्य कर्मी यात्रियों को जांच कराने के लिए आवाज लगाते हैं।

कुछ को रोकने का प्रयास भी करते हैं। लेकिन यात्री उनकी एक नहीं सुनते। स्थिति यह है कि बूथ के किनारे से आधे से ज्यादा बिना जांच के लिए बाहर निकलकर घर को रवाना हो जाते हैं। जांच नहीं होने के कारण संक्रमित यात्री की पहचान भी नहीं हो पाती। बूथ में मौजूद महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने रेलवे पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है।

जबकि रेलवे का कहना है कि उनसे जगह, टेबल- कुर्सी समेत जो व्यवस्थाएं मांगी गई थी उपलब्ध करा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग व रेल प्रशासन के बीच आपसी तालमेल की कमी का खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। क्योंकि ट्रेन से पहुंचने के बाद यात्री शहर में घूमते हैं उनके संपर्क में शहरवासी भी आ रहे हैं। स्थिति गंभीर है। इसके बावजूद किसी का ध्यान इस ओर नहीं है।

पांच से छह यात्री मिल चुके हैं संक्रमित

स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि जांच के दौरान जिन पर संदेह होता है उनका सैंपल भेजा जाता है। इसी के तहत पांच से छह यात्रियों की रिपोर्ट पाजिटिव आई है। इनमें पुणे व पंजाब के यात्री थे। ऐसे और भी यात्री मिलेंगे। बशर्तें वे खुद से जांच के लिए तत्परता दिखाए। हम तो उन्हें जांच के लिए कहते हैं, लेकिन दरकिनार कर बाहर निकल जाते हैं।

सुरक्षा बल का अभाव

स्थिति को देखकर यह तो स्पष्ट है कि जब यात्रियों पर सख्ती नहीं बरती जाएगी कि वे जांच कराने के लिए रुचि नहीं दिखाएंगे। महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि यह तभी संभव है जब पुलिस, जीआरपी या आरपीएफ की मदद मिलेगी। अभी कोई भी मौजूद नहीं है। पुरुष स्वास्थ्य कर्मियों को भी तैनात नहीं किया गया है।