खूबसूरती से इंडस्ट्री में टिका नहीं जा सकता, कला का होना जरूरी

रायपुर। मेरे पास न शक्ल है, न सूरत है, न पर्सनालिटी है। मैंने केवल अपनी कला से इतने दिनों तक सफर तय किया है। कई बार तो मैं कहता हूं कि भगवान, अगले जन्म में मुझे खूबसूरत बनाएं। हालांकि केवल खूबसूरती के कारण इंडस्ट्री में टिका नहीं जा सकता। कला का होना, बहुत जरूरी है। कला किसी के बाप की जागीर नहीं होती। कला जन्मजात होती है। बिना कला के कोई कलाकार नहीं बन सकता है। यह बात प्रसिद्ध बालीवुड कलाकार अन्‍नू मदनलाल कपूर ने कही।

वे राजधानी में आयोजित छत्तीसगढ़ साहित्य महोत्सव और 19वां राष्ट्रीय किताब मेला में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने आलम आरा किताब का विमोचन किया। किताब मेला इनडोर स्टेडियम बूढ़ापारा में 18 मार्च तक चलेगा। इस मौके पर उन्होंने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि बचपन में उनकी इच्छा डाक्टर बनने की थी, लेकिन पढ़ाई बीच में छूट गई। मां चाहती थीं कि कोई बड़ा अफसर बनूं, पर जिंदगी जहां ले जाना चाहती है, इंसान वहीं पहुंच जाता है। आर्ट या सिनेमा मेरा पैसन नहीं था, पर मजबूरी में आना पड़ा।

अब सिनेमा नहीं रह गया देखने लायक

अभिनेता अन्नू ने कहा कि आज भारतीय सिनेमा की दुर्दशा किसी छिपी नहीं है। सिनेमा पहले मनोरंजन का माध्यम होता था, लेकिन अब यह कारोबार बन गया है। इसी कारण सिनेमा (फिल्म) देखने लायक भी नहीं बचा है। उन्होंने आगे बताया कि मैं खुद सिनेमा जगत से अभी जुड़ा हूं, लेकिन तीन से अधिक साल से अधिक हो गया है, मैं न टीवी देख रहा हूं, न ही अखबार पढ़ रहा हूं। बशर्तें लोगों से जो जानकारी मिलती है, उसको ग्रहण कर रहा हूं।

पुरस्कारों में राजनीति हावी

अन्नू ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पद्मश्री का पुरस्कार सरकार तय करती है। उन्होंने इस पर चुटकी लेते हुए कहा कि आज पुरस्कारों में भी राजनीति हावी हो गई है। इसी कारण मैं कह सकता हूं कि अब पद्मश्री पुरस्कार में 60 फीसद राजनीति में पकड़ रखने वाले लोगों को दिया जा रहा है।

अभिनय का संबंध व्यक्तिगत काबिलियत से नही

अभिनेता कपूर ने कहा कि अभिनय का संबंध व्यक्तिगत काबिलियत से नहीं है। फिल्म की जो मांग होती है, उसी के मुताबिक आपको किरदार निभाना पड़ता है। अच्छा कलाकार भी वही है, जो फिल्म की मांग के अनुसार उस सीन को जो सोचा गया है, रिक्रिएट कर दे। एक अभिनेता डिमांड पर सीन को रिक्रिएट कर दे, वही एक्टिंग है।

कला होती है जन्मजात

कपूर ने कहा कि कला जन्मजात होती है। अगर कलाकार को सही हवा व खाद-पानी मिल जाए तो वह अपनी कला को और निखार लेता है। कला निखर सकती है, लेकिन कला बन नहीं सकती है। कितना भी अच्छा गुरु मिल जाए, किसी गधे को विद्वान नहीं बना सकता।

आर्ट एक्जीबिशन

साहित्य महोत्सव व 19वें राष्ट्रीय किताब मेले में अन्नू कपूर ने आर्ट एक्जीबिशन का उद्घाटन किया। आर्ट एक्जीबिशन कम सेल नए कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए आयोजित की गई है। आर्ट एक्जीबिशन के तहत एक एक पेंटिंग वर्कशाप का आयोजन किया जा रहा है। एक्जीबिशन व वर्कशाप के संयोजक अनिरुद्ध अवधिया ने बताया कि वर्कशाप 17 और 18 मार्च को आयोजित होगी। इसमें कोई भी व्यक्ति भाग ले सकता है, जिसे पेंटिंग का शौक है या वह अपनी पेंटिंग कला को निखारना चाहता है।