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कोटा के गोबरीपाट में मिली नवजात को मातृछाया में मिला आश्रय

बिलासपुर।  कोटा क्षेत्र के ग्राम गोबरीपाट के एक ग्रामीण के आंगन में मिली डेढ़ माह की बच्ची को बाल कल्याण समिति के आदेश पर मातृछाया में आश्रय दिया गया है। बच्ची सिम्स में भर्ती थी, जहां से चाइल्ड लाइन को सुपुर्द किया गया। चाइल्ड लाइन के सदस्य उसे लेकर समिति के समक्ष उपस्थित हुए।

घटना 11 मार्च की है। समर्पित संस्था द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग भारत सरकार के सहयोग से संचालित परियोजना चाइल्ड लाइन बिलासपुर के टोल फ्री नंबर 1098 पर सूचना मिली थी कि गोबरीपाट के एक दंपती के आंगन में मां डेढ़ माह की बच्ची को छोड़कर चली गई। चाइल्ड लाइन की टीम बच्ची को लेने के लिए रवाना हुई। इसी बीच कोटा थाना प्रभारी ने जानकारी दी कि बच्ची को सिम्स में भर्ती करने के लिए 102 से भेजा गया है। इसके बाद टीम सिम्स पहुंची।

बच्ची को आइसीयू वार्ड में भर्ती किया गया था। सोमवार को टीम फिर सिम्स पहुंची और बच्ची के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। वह स्वस्थ थी। इस पर सिम्स के अस्पताल अधीक्षक डा. पुनीत भारद्वाज की ओर से बच्ची को चाइल्ड लाइन बिलासपुर के सुपुर्द किया गया। चाइल्ड लाइन द्वारा बच्ची को अपने संरक्षण में लिया गया। इसके बाद सबसे पहले बच्ची की कोरोना जांच कराई गई।

इसके बाद उसे लेकर बाल कल्याण समिति में पेश किया गया। बाल कल्याण समिति के आदेश पर मातृछाया में आश्रय दिया गया। मालूम हो कि चाइल्ड लाइन 10 वर्षों से बाल सुरक्षा एवं संरक्षण पर कार्य कर रही है। अभी तक कई बच्चों को आश्रय व संरक्षण दिलाने में सफल रही है।