फोर्स के दबाव से घबराए नक्सली, शांति मार्च की आड़ में वार्ता की रखी शर्त

जगदलपुर। फोर्स के बढ़ते दबाव से घबराए नक्सलियों ने बस्तर में पहली बार बातचीत की पेशकश की है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि बुरी तरह घिर चुके नक्सली सम्मानजनक समाधान की राह तलाशने लगे हैं। यही वजह है कि नारायणपुर से रायपुर के लिए सिविल सोसाइटी की शांति यात्रा को ढाल बनाने की कोशिश की गई है। घबराहट छुपाने के लिए नक्सलियों ने मांगों की आड़ में बातचीत के प्रस्ताव का पर्चा जारी किया है। यात्रा में शामिल लोग प्रदेश में नक्सल हिंसा में बारह हजार से अधिक मौतों का हवाला देते हुए दोनों पक्षों में वार्ता से समाधान की जरूरत बता रहे हैं। यद्यपि नक्सलियों ने वार्ता की ऐसी शर्तें रखी हैं जिसे मानने के लिए सरकार शायद ही राजी हो। उनकी शर्तों में बस्तर से फोर्स हटाने, नक्सली नेताओं की बिना शर्त रिहा किए जाने और माओवादी संगठन से प्रतिबंध हटाने की मांग प्रमुख हैं।

अंदरूनी क्षेत्रांे में खुले कैंप

बीते चार दशकों से नक्सलवाद का दंश झेल रहे बस्तर में हालत तेजी से करवट ले रहे हैं। पिछले तीन साल में फोर्स ने ऐसे इलाकों तक अपनी पैठ मजबूत की है जहां पहले गश्त भी नहीं हो पाती थी। हाल ही में बीजापुर जिले को तेलंगाना से जोड़ने वाले रास्ते पर गलगम में फोर्स का कैंप खुला है। दंतेवाड़ा से नारायणपुर तक जाने वाली सड़क दशकों से बंद थी। फोर्स ने अब उस सड़क पर कैंप लगा दिया है। अबूझमाड़ में सोनपुर, आकाबेड़ा, कोहकामेटा, बासिंग आदि कैंप खुले हैं।

विकास कार्यों में आई तेजी

बीजापुर से पामेड़ का रास्ता खुल गया है। दंतेवाड़ा और बीजापुर की ओर से अबूझमाड़ में पहुंच बनाने के लिए इंद्रावती नदी पर तीन पुल बनाए जा रहे हैं। सुकमा जिले में जगरगुंडा तक जाने वाले तीनों रास्तों पर काम चल रहा है।

तीन सौ नक्सलियों का आत्मसमर्पण

बीते छह महीने में अकेले दंतेवाड़ा जिले में ही करीब तीन सौ नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। जैसे-जैसे फोर्स अंदर घुस रही है नक्सलियों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। उनकी दिक्कत नई शांति प्रक्रिया शुरू होने से भी बढ़ी है।

सिविल सोसायटी की शांति यात्रा

बस्तर के आईजी सुंदरराज पी ने कहा है कि नक्सलियों को क्रांति के नाम पर की जा रही क्रूर हिंसा का औचित्य बताना चाहिए। नक्सलियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प की ओर से जारी पर्चे में नई शांति प्रक्रिया के संयोजक शुभ्रांशु चौधरी को सरकारी दमन का मानवीय मुखौटा कहा गया है, पर इसी में बातचीत की पेशकश भी की गई है

रास्ता कठिन है

नई शांति प्रक्रिया के संयोजक शुभ्रांशु चौधरी कहते हैं कि रास्ता कठिन है। सरकार और नक्सलियों, दोनों को आगे बढ़ना चाहिए और बातचीत की टेबल पर आना चाहिए। सिविल सोसाइटी के लोग नई शांति प्रक्रिया के बैनर तले लगातार पदयात्रा, वेबिनार, पीड़ितों का रजिस्टर बनाने जैसे काम कर रहे हैं। वार्ता की मांग के साथ नारायणपुर से रायपुर के लिए पदयात्रा शांति यात्रा रवाना हो चुकी है। नक्सली हिंसा में दो दशक मेें 12 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। शुभ्रांशु मानते हैं कि कोलंबिया, फिलीपींस, नेपाल जैसे देशों में माओवाद खत्म हुआ तो इसकी वजह है कि दोनों पक्षों ने समाधान तलाशा।

एक दिन का मुद्दा नहीं- गृह मंत्री

गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा है कि सरकार की मंशा शांति स्थापित करना है। नक्सलियों के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा पर यह नहीं कह सकते कि क्या कदम उठाएंगे। यह एक दिन का मुद्दा नहीं है। मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद आगे के कदमों को लेकर फैसला किया जाएगा।