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कोरोना के कारण पिछड़ रही नगर निगम की राजस्व वसूली

इंदौर। कोरोना के बढ़ते मरीजों के कारण नगर निगम की राजस्व वसूली लगातार पिछड़ रही है। वित्त वर्ष का आखिरी महीना होने पर रोजाना औसतन एक से डेढ़ करोड़ रुपये तक की वसूली होनी चाहिए, जो अभी सिमटकर 50 से 60 लाख रुपये तक रह गई है। पहले ही नगर निगम पिछले साल की तुलना में वसूली से 100 करोड़ रुपये से पीछे चल रहा है और उस पर कोरोना की मार से वसूली कार्य लगातार पिछड़ रहा है

सूत्रों के अनुसार राजस्व वसूली पिछड़ने का मूल कारण यह है कि राजस्व विभाग के मैदानी अमले यानी सहायक राजस्व अधिकारी (एआरओ) और बिल कलेक्टर इन दिनों कोरोना प्रोटोकाल का पालन नहीं करने वालेे संस्थानों पर कार्रवाई में जुटे हैं। इस वजह से वे संपत्ति कर के बड़े बकायादारों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं और दिनभर में ज्यादातर समय उसी कार्रवाई में जा रहा है। इसके अलावा स्वच्छता सर्वे की टीम इंदौर पहुंचने के बाद इस काम में भी उन्हें सहभागिता करनी पड़ रही है। कोरोना के कहर से फिलहाल तो राहत मिलती नहीं दिखती, इसलिए निगम अधिकारी भी मान रहे हैं कि राजस्व वसूली का कार्य लगातार प्रभावित होगा। माना जा रहा है कि बड़े बकायादार ही अपना संपत्ति कर दे दें, तो निगम को करीब 80 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है। इसी तरह घर-घर कचरा संग्रहण शुल्क की वसूली भी पीछे ही है और लोगों से निगम को लगभग 70 करोड़ रुपये वसूलना बाकी है। हर साल की तरह जल कर वसूली में भी नगर निगम इस साल पीछे है।