झाबुआ : पोषक तत्वों की खान है मोरिंगा, इसके उपयोग को देंगे बढ़ावा

झाबुआ। विश्व जल दिवस के उपलक्ष्य में इनरेम फाउंडेशन आणंद (गुजरात) द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र झाबुआ के अटल सभागृह में एक वर्षीय मोरिंगा (सहजन) मील कार्यक्रम लांच किया गया। यह कैंपेन 22 मार्च से आरंभ होकर जनवरी 2022 तक चलेगा। इसमें झाबुआ और आलीराजपुर जिले के 800 स्कूल, आंगनवाड़ी, होस्टल में मोरिंगा का प्लांटेशन करने के साथ, मध्यान्ह भोजन बनाने वाले समूह को ब्लाक अनुसार ट्रेनिंग, क्विज काम्पीटिशन, चित्रकला प्रतियोगिता आदि गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। मोरिंगा विटामिनों से भरपूर एक सुपर फूड है जो हमारे शरीर को स्वस्थ और शक्तिशाली बनाता है। इसके उपयोग से हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी तेजी से बढ़ती है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक अधिकारी डा. आइएस तोमर, रोटरी मंडल के स्वास्थ चेयरमैन भरत मिस्त्री, संकल्प ग्रुप की संयोजक भारती सोनी, बैंक ऑफ बड़ोदा स्वरोजगार संस्था से अजय अवस्थी, राष्ट्रीय फ्लोरोसिस निवारण कार्यक्रम के प्रभारी डा. एलएन गर्ग, पीएचई विभाग से कौशल्या रावत उपस्थित थे। सरस्वती माता तथा राजमाता विजयराजे सिंधिया को माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर जिला कोर्डिनेटर सचिन वाणी ने पावर पाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से मोरिंगा मील कैंपेन के बारे मे विस्तार से बताया।

झाबुआ तथा अलीराजपुर जिला फ्लोरोसिस, सिकलसेल, एनीमिया, कुपोषण इन तीन बीमारियों में प्रदेश के टॉप 10 जिलों में आते हैं। वर्ष 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होने वाले हैं, फिर भी ये बीमारियां इन दो जिलों से जड़ से समाप्त नहीं हुई हैं। इन तीनों का संबंध न्यूट्रिशन, केल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन सी, प्रोटीन, आयरन, विटामिन डी आदि पोषक तत्वों की कमी से होता है।

रोटरी क्लब अपना मेघनगर के भरत मिस्त्री ने बताया कि झाबुआ तथा आलीराजपुर जिले में सात मंडल हैं। इन मंडलों में मोरिंगा कैंपेन संबंधित, जो भी सहयोग होगा, उसमें पूरी मदद की जाएगी। कार्यक्रम मुख्य अतिथि डा. आईएस तोमर ने बताया कि मोरिंगा एक जल्दी बढ़ने वाला पौधा है। ये हमारे स्वास्थ्य को तो ठीक करता ही, साथ ही आजीविका के अवसर प्रदान करने में महत्वपूर्ण है। जिले में मोरिंगा के साथ सोयाबीन में भी प्रोटीन आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं। एक किलो सोयाबीन से सात लीटर दूध बनाया जा सकता है। पनीर, सोयाबड़ी, आटे आदि में प्रयोग करें तो 50 प्रतिशत बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

राष्ट्रीय फ्लोरोसिस निवारण कार्यक्रम के प्रभारी डा. एलएन गर्ग ने बताया कि हर व्यक्ति को इसे अपने दैनिक भोजन में उपयोग करना चाहिए। मोरिंगा तो हमारे कल्चर में पहले से ही था। जिला चिकित्सालय में जल्द ही वाटर, यूरिन में फ्लोराइड के लिए लेब स्थापित होने वाली है। संकल्प ग्रुप संयोजक भारती सोनी ने भी इस कारगर स्वास्थ्य प्रोजेक्ट में अपनी संस्थाओं की ओर से पूर्ण सहयोग देने की बात कही।

इस दौरान सभी अतिथियों तथा प्रतिभागियों द्वारा मोरिंगा मील कैंपेन का पोस्टर लांच किया गया। सचिन वाणी ने बताया कि कार्यक्रम में एक्सपर्ट के रूप में डा. सुनीता सपुर, डा. मेघना शुक्ला, कल्पना बिलवाल जिला फील्ड कार्यक्रम अधिकारी, सरिता खराड़ी द्वारा इस संबंध में अपने-अपने अनुभव साझा किए गए। कैंपेन में विभिन्ना सरकारी विभागों में महिला तथा बाल विकास विभाग, स्वास्थ विभाग, पीएचई विभाग, शिक्षा विभाग, फारेस्ट, कृषि, उद्यानिकी विभाग, सामाजिक संस्थाओं तथा एनजीओ, रोटरी क्लब मेघनगर, आशा, आईजीएसएस, संकल्प ग्रुप, समावेश, मां शक्ति, ब्रेड फार ट्रायबल विलेज आदि का विशेष सहयोग प्राप्त होगा

कार्यक्रम को सफल बनाने में डा. चंद्रशेखर, अंकिता पाठक, काशीराम बघेल, अर्चना डावर, खुशबू, प्रकाश डामोर, अजय, डा. भारत निंगवाल, केवलसिंह डामोर, अजय चौहान जितेंद्र पाल, सरिता खराड़ी, सोहनसिंह भूरिया, अर्जुन खराड़ी आदि ने सहयोग प्रदान किया। कार्यक्रम के बाद पत्रकार वार्ता के माध्यम से भी इनरेम फाउंडेशन के जिला कोर्डिनेटर सचिन वाणी ने मोरिंगा मील प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी।