हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं, कलेक्टर सारांश मित्तर के खिलाफ लगी अवमानना याचिका

बिलासपुर। अरपा नदी किनारे रिवर व्यू टू सड़क निर्माण व सुंदरीकरण के चलते लकड़ी व्यावसायियों को पट्टे की जमीन से बेदखल किया जा रहा है। इस मामले में व्यापारियों की याचिका हाई कोर्ट में लंबित है। फिर भी प्रशासन ने कोर्ट को नजरअंदाज करते हुए उन्हें बेदखली की कार्रवाई शुरू कर दी। इस पर व्यावसायियों ने कलेक्टर डा. सारांश मित्तर के खिलाफ न्यायालय की अवमानना याचिका लगाई है।

स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत अरपा नदी रिवर व्यू वन से आगे रिवर व्यू टू सड़क निर्माण के लिए बिलासपुर तहसीलदार के आदेश पर राजस्व विभाग द्वारा जमीन का सीमांकन कराया गया। इसके तहत इंदिरा सेतु पुल से लेकर शनिचरी बाजार जूना बिलासपुर तक सड़क चौड़ीकरण व सुंदरीकरण किया जाना है। इस योजना के तहत शनिचरी बाजार जाने वाली सड़क के दोनों किनारे लकड़ी व्यापारियांे की बड़ी-बड़ी दुकानें है, जो सड़क चौड़ीकरण के जद में आ रहे हैं। लिहाजा, उन्हें हटाने की कार्रवाई चल रही है।

इसके लिए जमीन का सीमांकन चल रहा है। इधर, व्यावसायियों ने जिला प्रशासन व निगम की इस कार्रवाई की खिलाफत शुरू कर दी है। उन्होंने इस मामले में हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की है। उनका कहना है कि नजूल विभाग ने वर्षों पहले पट्टा जारी किया था। वे सभी नजूल द्वारा आबंटित जमीन पर ही कब्जा किए हैं और वास्तविक कब्जाधारी हैं। उनके द्वारा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया गया है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में उनकी याचिका लंबित है। फिर भी प्रशासन कोर्ट को दरकिनार कर अपनी मनमानी कर रहा है।

जिला प्रशासन व निगम की इस कार्रवाई के खिलाफ व्यावसायियों ने हाई कोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है। इसमें बताया गया है कि जब तक न्यायालय का आदेश नहीं आ जाता उन्हें नजूल द्वारा जारी पट्टे की जमीन पर काबिज रखा जाए। वहीं, हाई कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने के मामले में कलेक्टर डा. सारांश मित्तर के खिलाफ कार्रवाई की जाए। बुधवार को इस प्रकरण की सुनवाई हाई कोर्ट ने लिस्ट में रखा है।