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कानन में पहाड़ी बकरा की मौत, दोनों फेफड़े हो चुके थे खराब

बिलासपुर।  कानन पेंडारी जू में वन्य प्राणियों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। हिप्पोपोटामस के बाद बुधवार को एक नर गोराल (पहाड़ी बकरा) की मौत हो गई। पोस्टमार्टम में उसके दोनों फेफड़े खराब होने की पुष्टि हुई है। शव विच्छेदन के बाद मृत गोराल का दाह कर दिया गया।

वर्ष 2015 में दिल्ली स्थित नेशनल जुलाजिक पार्क से एक नर व एक मादा गोराल कानन पेंडारी जू लाया गया था। मादा की पहले ही मौत हो चुकी है। नर अकेले केज में रहता था। पांच दिन पहले अचानक उसे लकवा मार दिया। इसके बाद कारण उठ नहीं पा रहा था। उसकी हालत देखकर पशु चिकित्सक इलाज में जुटे थे। इससे हालत में थोड़ी सुधार भी आया। लेकिन सुबह 11.30 बजे अचानक उसकी मौत हो गई।

इस घटना से जू प्रबंधन सकते में आ गया। दरअसल कुछ दिन पहले कानन में गजनी नाम के हिप्पोपोटामस की मौत हुई थी। लगातार वन्य प्राणियों की मौत जू प्रबंधन की व्यवस्था पर सवाल भी खड़ा कर रहा है। गोराल की मौत की सूचना तत्काल अधिकारियों को दी गई। उनके पहंुचने के बाद जू में पशु चिकित्सकों की तीन सदस्यीय टीम डा. आरएम त्रिपाठी, डा. अजीत पांडेय और डा. स्मिता प्रसाद ने पोस्टमार्टम किया।

कानन पेंडारी जू के अधीक्षक संजय लूथर ने बताया कि मृत गोराल 11 साल का था। यह अनुसूची तीन का वन्य प्राणी है। इनकी उम्र 12 से 14 साल होती है। इस लिहाज से वह उम्रदराज हो चुका था। इसके कारण उसे पांच दिन पहले लकवा मारा था।

मौत के बाद कानन पेंडारी जू में अब केवल दो गोराल ही बच गए हैं। इस जोड़े को भी तीन दिन पहले नेशनल जुलाजिक पार्क दिल्ली से लाया गया है। यहां लाने के बाद सीधे केज में छोड़ दिया गया।