राफेल से सर्जिकल स्ट्राइक करेंगे बच्चे, हाथरस के गुलाल से जश्न

बिलासपुर।  होली का खुमार लोगों में हावी होने लगा है। बाजार में दुकानें रंग और पिचकारी से सजने लगी हैं। अबीर-गुलाल की बिक्री भी शुरू हो चुकी है। हाथरस का प्रसिद्ध रंग-गुलाल बड़े पैमाने पर दुकानों में सज गया है। बच्चों के लिए मोदी मास्क की धूम मची है। चिल्हर विक्रेता मोनू भुसनवार का कहना है कि बालाकोट में हुई सर्जिकल स्ट्राइक का असर भी बाजार पर दिखेगा। दुकानों पर राफेल पिचकारी के साथ एके-47, टैंक व प्रेशर पिचकारियां आ चुकी हैं। बच्चे इन्हें खूब पसंद कर रहे हैं। टैंक बम के रूप में रंगीन बैलून उपलब्ध हैं। बालीवुड के अभिनेताओं व अभिनेत्रियों के बालों वाली विग व रंगीन चश्मे भी हैं।

गोल बाजार, तेलीपारा, पुराना बस स्टैंड से लेकर सरकंडा, रेलवे बुधवारी बाजार, दयालबंद, तारबाहर चौक, व्यापार विहार सहित तिफरा व मंगला के बाजार व दुकानें होली के रंग-गुलाल और पिचकारी से भर गए हैं। बिलासपुर में इस वर्ष हर्बल रंगों की खासी मांग है।

इसमें पेंड्रारोड, कोरबा, अंबिकापुर, मुंगेली तखतपुर समेत हाथरस के रंग-गुलाल पसंद किए जा रहे हैं। बाजार में बच्चों के लिए स्पाइडर मैन, छोटा भीम, कृष, मोटू पतलू पिचकारियां आ चुकी हैं। स्प्रे और ठंडे गुलाल को ग्राहक खूब पसंद भी कर रहे हैं। चिल्हर विक्रेता पवन खटिक का कहना है कि अभी से लोग फोन कर अपनी पसंद बता रहे हैं। बच्चों के लिए मुखौटा, मास्क भी हैं।

तारबाहर स्थित रंगोली दुकान में बच्चों के लिए बंदूक, टोपी, स्प्रे, गुलाल समेत हर्बल रंग-गुलाल सजे हुए हैं। थोक विक्रेता जोगेंदर कुमार ने कहा कि सबसे अच्छी बात यह है कि बाजार में होली सामानों के भाव में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। त्योहारी सीजन में देशी सामान के आने से लोगों का रुझान भी बढ़ा है

बाजार में इस बार चाइनीज पिचकारी और बलून गायब हो गए हैं। स्वदेशी पिचकारी और रंग गुलाल लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। इसके कारण व्यापारी भी खुश हैं। उनका कहना है कि चाइनीज सामग्री में गुणवत्ता नहीं होती थी। स्वदेशी सामान ने बाजार में प्रवेश कर लिया है। महिला स्व सहायता समूहों द्वारा भी कई जगह बिक्री करने की तैयारी है।

चाइनीच बाजार के कमजोर पड़ते ही स्वदेशी सामान बाजार में जगह बनाने में कामयाब हुए हैं। अब सस्ता, सुंदर और टिकाऊ चीजें दुकानों में मिलने लगे हैं। होली के सामानों में टैंकनुमा पिचकारी 100 से 500 रुपये तक में उपलब्ध हैं। पंप 20 से 400 रुपये, हर्बल गुलाल पैकेट 10 से 50 रुपये, रंग 15 से 130 रुपये, सुगंधित गुलाल 20 से 100 रुपये, बंदूक 20 से 100 रुपये, टोपी 10 से 30 रुपये, स्प्रे 30 से 80 रुपये, ढोल बाजार 10 से 50 रुपये तक में मिल रहे हैं

न्यायधानी के कई परिवार और युवा इस बार इंटरनेट मीडिया के माध्यम से घर में बनाए रंग-गुलाल की बिक्री भी कर रहे हैं। फुलवारी संस्था द्वारा बकायदा गुलाल बनाकर गरीबों को बांटा जा रहा है। डा. पुरुषोत्तम वाट्सएप के जरिए हर्बल गुलाल का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। इस होली में कई ऐसे लोग हैं जो त्योहारी सीजन में स्टार्ट अप के जरिए रोजगार भी हासिल कर चुके हैं।

गुलाल विक्रेता दिलीप जाना के मुताबिक उत्तर प्रदेश का हाथरस नगर देश में रंग वा गुलाल की बड़ी मंडी है। यहां रंग और गुलाल बनाने का काम कुटीर उद्योग के रूप में फैला है। यहां के बने रंग होली पर देशभर में बरसते हैं। देश के अलग-अलग राज्यों में रंग बनते हैं, लेकिन गुणवत्ता के मामले में हाथरस का रंग सबसे आगे है।