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हाथ को मिला सीएम का साथ, असम में कांटे की टक्कर

असम के विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ चुनाव की झलक भी नजर आ रही है। छत्तीसगढ़ की तर्ज पर यहां का मतदाता भी खामोश है। वह परिवर्तन तो चाहता है, लेकिन यह साफ नहीं कर पा रहा कि सत्ता परिवर्तन किसके पाले में करना है।

पिछले विधानसभा चुनाव में लोअर असम में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी टीम ने लोअर असम में जोरदार मेहनत की है। लगातार 15 साल से सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस को न सिर्फ संगठन के ढांचे का नुकसान उठाना पड़ा था, बल्कि कई दिग्गज नेता भाजपा के पाले में चले गए थे।

दो महीने में टीम भूपेश ने न सिर्फ कांग्रेस का संगठन खड़ा किया, बल्कि चुनाव कैंपेन की दिशा को भी धारदार बनाया। इस चुनाव में कांग्रेस ने लोअर असम में सीएए और चाय बागान के मजदूरों का कार्ड खेला है, जिसका असर कांग्रेस के पाले में होता नजर आ रहा है। वहीं कांग्रेस के सहयोगी बदरुद्दीन अजमल के कारण ध्रुवीकरण भी हो रहा है।

यह ध्रुवीकरण किस पाले में जाएगा यह कह पाना अभी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि मतदाता खामोश है। राजनीतिक विश्लेषक अफरीदा हुसैन की माने तो पिछले चुनाव में परिवर्तन दिखाई दे रहा था। वोटर खुलकर बोल रहे थे कि इस बार सत्ता का परिवर्तन होगा, लेकिन इस चुनाव में मतदाता शांत हैं। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों के वोटरों में सुगबुगाहट नहीं होना, राजनीतिक दलों की धड़कन बढ़ा रहा है।

गुवाहाटी के कारोबारी सुमन तालुकदार की माने तो सीएए का असर शहरी वोटरों पर पड़ा है। ग्रामीण वोटर सीएए से अनभिज्ञ हैं, इसलिए उन इलाकों में इसका चुनाव पर असर दिख नहीं रहा है। गुवाहाटी के शहरी इलाकों की विधानसभा सीट पर कांग्रेस की तुलना में भाजपा ज्यादा मजबूत नजर आ रही है।

अब तक दो पार्टियों के बीच हो रहे चुनाव में तीसरे गठजोड़ ने मुकाबले को पेचीदा बना दिया है। सीएए के विरोध में बनी रायजोर दल (आरडी) और असम जातीय परिषद (एजेपी) कांग्रेस गठबंधन के एक बड़े वोट बैंक में सेंध लगाती दिख रही है। इससे अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को फायदा होता नजर आ रहा है।

बरपेटा जिले के अजीत पाठक का कहना है कि ऊपरी असम में पिछले चुनावों में मुस्लिम वोटरों ने भी भाजपा के पक्ष में मतदान किया था, लेकिन इस बार मुस्लिमों का बड़ा वोट बैंक कांग्रेस गठबंधन और तीसरे गठजोड़ की तरफ जाता नजर आ रहा है। अली (अपर असम के मुस्लिम) और कुली (चाय बागान के मजदूर) इस बार निर्णायक भूमिका में रहेंगे।

माजुली और जोरहाट सीट पर सबकी नजर

असम की माजुली और जोरहाट सीट पर सबकी नजर है। माजुली सीट पर वर्तमान मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनेवाल चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं जोरहाट सीट पर विधानसभा अध्यक्ष हितेंद्र नाथ गोस्वामी भाजपा से ताल ठोके हुए हैं। माजुली सीट पर 2016 में सर्बानंद सोनावाल को जीत हासिल हुई थी, लेकिन वर्ष 2001, 2006 और 2011 में कांग्रेस उम्मीदवार राजीब लोचन पेगु यहां से विधायक चुने गए थे। जोरहाट सीट पर हितेंद्र नाथ गोस्वामी वर्ष 1991, 1996 और 2001 में असम गण परिषद से विधायक चुने गए थे। 2006 और 2011 में यह सीट कांग्रेस के राणा गोस्वामी के खाते में गई थी।

गठबंधन के बीच त्रिकोणीय मुकाबला

भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन में असम गण परिषद (एजीपी) और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) शामिल है। कांग्रेस के महागठबंधन में आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआइयूडीएफ), बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ), आंचलिक गण मोर्चा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआइ) और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआइ-एम) शामिल है। वहीं, सीएए का विरोध करने वाले दल रायजोर दल (आरडी) और असम जातीय परिषद (एजेपी) का गठबंधन मैदान में है।

दो करोड़ 31 लाख मतदाता तय करेंगे असम का भविष्य

चुनाव आयोग के मुताबिक 2021 के असम विधानसभा चुनाव के लिए इस बार दो करोड़ 31 लाख 86 हजार 362 मतदाता मतदान करेंगे। इनमें से एक करोड़ 17 लाख 42 हजार 661 पुरुष और एक करोड़ 14 लाख 43 हजार 259 महिला और 442 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। कोरोना को देखते हुए चुनाव आयोग ने मतदान का समय एक घंटा बढ़ा दिया है।

जानिए इन आंकड़ों को भी

असम में तीन चरण में मतदान होंगे। 27 मार्च और एक अप्रैल को मतदान हो चुका है। तीसरे चरण का मतदान छह अप्रैल को होगा।

2 मई को चुनाव परिणाम आएगा।

126 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव होगा, आठ सीट अनुसूचित जाति और 16 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है।