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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा- तीस दिन में दूर करें अवसादग्रस्त पुलिस कर्मी की शिकायत

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक याचिका इस निर्देश के साथ निराकृत कर दी कि अवसादग्रस्त पुलिस कर्मी की शिकायत 30 दिन के भीतर दूर कर दी जाए। दमोह के पुलिस अधीक्षक को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सेहत पर प्रतिकूल असर: न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता दमोह निवासी पुलिस कर्मी अनिल रजक का पक्ष अधिवक्ता भूपेंद्र कुमार शुक्ला ने रखा। उन्होंने दलील दी कि याचिकाकर्ता मानसिक रूप से बेहद तनाव में है। उसे गहरा अवसाद है। इस वजह से रात में ड्यूटी करना मुश्किल है। 21 मार्च, 2020 को एसपी दमोह को इस संबंध में आवेदन दिया था। जिसमें सारी समस्या से अवगत कराया गया। इसके बावजूद सहानुभूति का परिचय नहीं दिया गया। याचिकाकर्ता की पूर्ववत नाइट ड्यूटी लगाई जाती है। मानसिक अवसाद की अवस्था में नाइट ड्यूटी से याचिकाकर्ता की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वह बेहद कमजोर हो गया है। परिवार भी परेशान है। लिहाजा, दिन के समय कार्य लिया जाना चाहिए। जब याचिकाकर्ता पूरी तरह दुरुस्त हो जाएगा, तब वह किसी भी समय नौकरी के लिए तैयार रहेगा। हाई कोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद याचिकाकर्ता के हक में दिशा-निर्देश सहित याचिका का पटाक्षेप कर दिया।

दो गांजा तस्करों को सजा : एनडीपीएस के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार पाठक ने गांजा तस्करी के आरोप में दो गांजा तस्करों को 5-5 साल की सजा और 20-20 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार 20 फरवरी 2016 को हनुमानताल पुलिस को सूचना मिली कि मैदान में तीन युवक गांजा बेचने के लिए कार क्रमांक एमपी-20-सीडी-1725 में बैठकर ग्राहक का इंतजार कर रहे है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपितों को पकड़ा। तलाशी में कार से 6 किलो 200 ग्राम गांजा जब्त किया गया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने दो आरोपियों को 5-5 साल की सजा सुनाई, जबकि एक किशोर आरोपी का प्रकरण किशोर न्यायालय में विचाराधीन है। शासन की ओर से लोक अभियोजक अशोक पटेल ने पैरवी की।