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भाटापारा।भीड़ होने के कारण तथा जानकारी के अभाव में भटक रहे वैक्सीन लगाने वाले लोग, स्वयं को जनसेवक कहने वाले नेता सोशल मीडिया में देश -प्रदेश की सरकार को कोष कर , रोड सेफ्टी क्रिकेट टूर्नामेंट , असम चुनाव तथा घूमकर सोशल मीडिया में अपनी सेल्फी डाल कर क्या दर्शा रहे थे, क्या ये सब कर के वो अपनी कोरॉना से लड़ाई में भूमिका निभा रहे थे। सोचनीय

भाटापारा। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर महामारी के रूप में अपना प्रचंड रूप धारण कर रही है। शहर की बात करें तो लगभग रोज 40- 50 मरीज निकलना अपने आप में इस महामारी की तीव्रता को दर्शाता है। इस महामारी से बचने का सबसे कारगर उपाय वैक्सीन लगाना है। मगर भाटापारा शहर में फाटक के इस पार एक केंद्र होने की वजह से वैक्सिन लगाने लोगो को भटकना पड़ रहा है। भीड़ एवं अनियमितता होने की वजह से लोग केंद्र जाकर वापस लौट रहे हैं, जो चिंता को बढ़ा रहा है।
भाटापारा शहर के स्वयंभू जनसेवक कहने वाले राजनेता सिर्फ सोशल मीडिया में कोरोनावायरस से लड़ाई लड़ रहे हैं, और देश- प्रदेश कि सरकार को कोष रहे हैं, पर उनके द्वारा जमीन पर उतर कर व्यवस्था सुधारने कोई पहल नहीं दिख रही है। प्रशासनिक व्यवस्था भी लचर नजर आ रही है। लोगों को वैक्सीन लगाने के लिए जागरूक करना सबसे ज्यादा आवश्यक है। और इसके लिए शहर में तीन से चार केंद्र होना अनिवार्य है। ताकि लोग भीड़ और अनियमितता के कारण इससे दूर न जाए।