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टीबी वार्ड में एक्सपायरी दवाओं का स्टॉक, वीडियो वायरल, स्टाफ ने जलाईं गोलियां

ग्वालियर। टीबी के मरीजों को देने के लिए शासन से आईं लाखों रुपये की दवाएं 2018 में एक्सपायर हो गईं। इन दवाओं का पूरा स्टॉकजयारोग्य चिकित्सालय समूह के टीबी अस्पताल में रखा है। इस स्टॉक का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने की सूचना मिलते ही स्टाफ ने इन दवाओं को बिना किसी को सूचना दिए जलाना शुरू कर दिया। वहीं इंटरनेट मीडिया पर वीडियो डालने वालों ने एक्सपायरी दवाओं को टीबी मरीजों को बांटने का अंदेशा जताया है।
टीबी की बीमारी को खत्म करने के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वह मरीजों के हिसाब से अस्पतालों में दवाएं भेजती है, जो टीबी मरीजों को निशुल्क दी जाती हैं, लेकिन ग्वालियर के टीबी अस्पताल में आईं दवाओं का वितरण मरीजों को नहीं किया गया। इसके कारण यह दवाएं 2018 में एक्सपायर हो गईं। एक्सपायर होने के बाद इन दवाओं को नष्ट नहीं किया गया। इसकी जानकारी वायरल वीडियो के जरिए अधिकारियों और आमजनों को लगी तो स्टाफ ने टीबी अस्पताल के परिसर में आग लगाकर दवाओं को नष्ट करना शुरू कर दिया।
एक्सपायरी दवाएं नहीं रखते अस्पताल में
दवाओं के एक्सपायर होने के बाद उन्हें लंबे समय तक अस्पताल में नहीं रखा जा सकता है। एक्सपायर दवाओं को नष्ट करने के लिए कमेटी का गठन किया जाता है, जो समय-समय पर यह निर्णय लेती है कि दवाओं को कब और किस प्रकार नष्ट करना है।
खुले में नहीं जला सकते दवाएं
एक्सपायर दवाओं को खुले में नहीं जलाया जा सकता है। खुले में जलाने से प्रदूषण होता है और दूसरा दवाओं के जलाने पर निकलने वाला धुंआ भी लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
वर्जन
वर्ष 2016-17 में यह दवाएं आई थीं, लेकिन बाद में सरकार ने टीबी मरीजों के लिए एक डोज निर्धारित कर दिया और नई दवाएं भेज दीं। इसके कारण यह दवाएं एक्सपायर हो गईं। इन्हें जल्द ही नष्ट कराया जाएगा। टीबी अस्पताल के पलंगों को कोरोना में जोड़ दिया गया है। ऐसे में टीबी वार्ड के लिए पीछे से रास्ता बनाने के लिए कचरे को साफ कर जलाया गया है, दवाएं नहीं जलाई हैं।
सीमा जायसवाल, प्रभारी टीबी अस्पताल