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एक साथ शुरू होंगे नवरात्र व रमजान, मनाई जाएगी चेटीचंड व बैसाखी

ग्वालियर। अनेकता में एकता का प्रतीक भारत देश में विभिन्न धर्म व समुदाय एक साथ मिलकर रहते हैं। आगामी 13 व 14 अप्रैल को देश में एक बार फिर गंगा-जमुनी तहजीब की तस्वीर देखने को मिलेगी। इस साल 13 अप्रैल को हिंदू नववर्ष (नवसंवत्सर 2077) शुरू हो रहा है। 13 से ही चैत्र नवरात्र, गुड़ी पड़वा, व रमजान भी शुरू हो रहे हैं। साथ ही सिंधी समाज द्वारा झूलेलाल जयंती श्रद्धाभाव से मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि इस वर्ष एक ही दिन 13 अप्रैल को अलग-अलग समुदाय के लोगों द्वारा त्यौहार मनाए जाएंगे। हालांकि कोरोना के कारण भव्य आयोजन नहीं हो सकेंगे।हिंदू नववर्ष भी 13 अप्रैल को शुरू हो रहा है। चैत्र नवरात्र को देखते हुए माता के मंदिरों में सफाई व अन्य तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। प्रतिपदा तिथि से नवरात्र का प्रारंभ होगा और वह 9 दिन तक चलेगा। जिसमें मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की आरधना की जाएगी। कोरोना के कारण भीड़ भरे मेले नहीं लगेंगे।

गुड़ी बनाकर होगा विधि विधान से पूजन, नहीं होगी भीड़ः 13 अप्रैल को महाराष्टीयन लोगों द्वारा गुड़ी पड़वा श्रद्धाभाव से मनाई जाएगी। यूं तो सभी इस पर्व को मनाते हैं, मगर मराठियों द्वारा इसे प्रमुखता से मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इस तिथि को उगादि भी कहा जाता है। सच्चिदानंद नाथ ढोली बुआ महाराज ने बताया कि डाेली बुआ का मठ, वायकर लक्ष्मीगंज, आभा महाराज का मठ में गुड़ी पड़वा पर विशेष पूजन किया जाता है। गुड़ी पड़वा वह दिन होता है, जिस दिन ब्रह्माजी ने इस विश्व को व मानव देह को बनाया था। इस दिन डंडे के ऊपर नए वस्त्र पहनाकर, उसके ऊपर लोटा लगाकर चेहरा बनाया जाता है, जिसे गुड़ी कहा जाता है। इस गुड़ी का चौक पूरकर विभिन्न पकवानों का भोग लगाकर विधि विधान से पूजन किया जाता है। गौरतलब है कि गुड़ी पड़वा नई फसल के आगमन की खुशी मनाने का त्यौहार है। कई राज्यों में इसे फसल दिवस के रूप में मनाते हैं। मान्यता है कि इस दिन अपने घर को सजाने और गुड़ी फहराने से घर में सुख समृद्धि आती है और बुराइयों का नाश होता है।

शताब्दी वर्ष पर वैसाखी के लिए सजा गुरुद्वाराः सिख व पंजाबी समुदाय के लोगों द्वारा 13-14 अप्रैल को हर्षोल्लास से बैसाखी पर्व मनाया जाएगा। यह पर्व वैसाख माह की शुरुआत में मनाया जाता है, जो इस बार 14 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। गुरुद्वार प्रबंध कमेटी फूलबाग के प्रधान एचएस कोचर ने बताया कि वैसाखी के लिए 11 अप्रैल से अखंड पाठ शुरू हो गया है। 13 अप्रैल को विशेष भजन कीर्तन किए जाएंगे। इस साल फूलबाग गुरुद्वारे की शताब्दी भी मनाई जाएगी। अब से 100 साल पहले जीवाजी राव सिंधिया सिंधिया ने दाता बंदी छोड़ की याद में गुरुद्वारा बनवाकर गुरुद्वारा कमेटी को सुपुर्द किया था। गुरुद्वारे की आकर्षक विद्युत सज्जा भी की जा चुकी है। इस साल भव्य कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी प्रबंध कमेटी ने की थी, मगर कोरोना के कारण आयोजन सीमित रखा जाएगा।

चेटीचंड पर सिंधी समाज घर-घर पहुंचाएगा प्रसादः सिंधी समाज का मुख्य पर्व भगवान झूलेलाल का जन्मोत्सव ‘चेटीचंड” 13 अप्रैल को श्रद्धाभाव से मनाया जाएगा। सिंध नवयुवक सामाजिक सुरक्षा मंडल के जिलाध्यक्ष राजेश कुमार धमेचा एवं मुख्य संरक्षक श्रीचंद बलेचा ने बताया कि हर साल चेटीचंड पर ग्वालियर स्थित महाराज बाड़े पर स्टाल लगाए जाते थे। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया जाता था, मगर कोरोना को देखते हुए लोगों के घर-घर प्रसाद वितरण किया जाएगा। भगवान झूलेलाल का दानाओली व माधौगंज में मुख्य मंदिर हैं, जहां श्रद्धाभाव से सिंधी समाज के लोग पूजा अर्चना करने पहुंचते हैं। इस साल 4-5 लोग जाकर मंदिर में दीपक जलाकर आएंगे

प्रशासनिक आदेशानुसार होगी रमजान की नमाजः मुस्लिम समुदाय का माह-ए-रमजान भी शुरू होने वाला है। रमजान का चांद दिखने के साथ ही रमजान शुरू हो जाएगा। शहर काजी ग्वालियर अब्दुल अजीज कादरी ने बताया कि अगर 12 अप्रैल 2021 को चांद दिखाई दे जाता है, तो पहला रोजा 13 अप्रैल को रखा जाएगा, लेकिन अगर चांद 13 अप्रैल को दिखाई देता है तो पहला रोजा 14 अप्रैल को रखा जाएगा। रमजान की विशेष नमाज के लिए संभवत: मध्यप्रदेश शासन व जिला कलेक्टर द्वारा कोई निर्देश जारी किए जाएंगे, जिनका पिछले साल की तरह ही पालन किया जाएगा। गौरतलब है कि रमजान में अकीदतमंदों की मस्जिदों में अधिक भीड़ उमड़ती है, ऐसे में कोरोना से बचाव के लिए विशेष कोविड गाइडलाइन जारी हो सकती है। रमजान का महीना कभी 29 दिन का तो कभी 30 दिन का होता है। इस महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग उपवास रखते हैं। रोजा शुरू होने से पहले सुबह कुछ खाया जाता है जिसे सहरी कहा जाता है। इसके बाद सूर्यास्त के बाद रोजा खोला जाता है, जिसे इफ्तारी कहते हैं।