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क्राफ्ट पेपर के दाम आसमान पर, मुश्किल में उद्यमी, कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग

लुधियाना। कोरोना के चलते कच्चे माल की कीमतों में लगातार उछाल, आयात में दिक्कत और समुद्री माल भाड़े में बेतहाशा वृद्धि के कारण कागज महंगा हो रहा है। पैकेजिंग के लिए उपयोग होने वाले क्राफ्ट पेपर की कीमतें दोगुनी से भी अधिक हो गई हैं। उद्योगों के लिए भी पैकेजिंग की लागत 30 से 35 फीसद तक बढ़ गई है।

कीमतों पर नियंत्रण के लिए उद्यमियों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले क्राफ्ट पेपर में 90 फीसद योगदान रद्दी कागज का होता है। इसका आयात यूरोप, अमेरिका, पश्चिम एशिया समेत कई देशों से किया जाता है।

इंडियन एग्रो पेपर इंडस्ट्री के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अनिल कुमार ने कहा कि वैश्विक बाजार में रद्दी कागज की किल्लत के अलावा समुद्री माल भाड़ा भी चार गुना तक बढ़ गया है। इससे आयात करना महंगा पड़ रहा है। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ मास्टर प्रिंटर्स के अध्यक्ष प्रो कमल चोपड़ा ने कहा कि चीन ने प्रदूषण समस्याओं के चलते रद्दी के आयात पर रोक लगा दी है। वहां पर पैकेजिंग के लिए क्राफ्ट पेपर की मांग है।

ऐसे में दुनियाभर के कई छोटे-छोटे निर्माताओं ने सस्ता क्राफ्ट पेपर बना कर चीन को बेचना शुरू कर दिया। इससे भी रद्दी की बाजार में किल्लत आ गई। लुधियाना हैंड टूल्स एसोसिएशन के प्रधान एससी रल्हन ने कहा कि उद्योगों के लिए पैकेजिंग अहम है। पैकेजिंग पर खर्च ही 35 से 40 फीसद तक बढ़ गया है। इसे मैनेज करना मुश्किल हो रहा है। सरकार को बढ़ रही इनपुट लागत को कम करने के लिए उपाय करने की जरूरत है।