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कोरोना की भयावह स्थिति से निपटने अभी से किये जाएं जरूरी इंतजाम, दद्दा जी परिसर में बनाया जाए अस्थायी अस्पताल

जबलपुर। शहर में कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। मरीजों संख्या भी लगातार बढ़ रही है। अस्पताल फुल ही चुके है। श्मशानो में दाह संस्कार के लिए जगह नही मिल रही है। कोरोना को विस्फोटक स्थिति का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि जबलपुर में अप्रैल माह के सिर्फ 13 दिनों में ही 4 हजार 564 कोरोना संक्रमित सामने आए।

अब तक 24 हजार 222 लोग कोरोना से ग्रसित हो चुके है। जबकि 3 हजार 890 अब भी संक्रमित है। ऐसे हालातो को देखते हुए अब कोरोना मरीजों के उपचार के लिए अस्थाई अस्पताल अभी से बनाया जाना जरुरी हो गया है। प्रशासन चाहे तो मदनमहल स्थित दद्दा जी परिसर को अस्थाई अस्पताल के रूप में विकसित कर सकता है। ताकि समय रहते मरीज़ों का उपचार किया जा सके। ये सुझाव कलेक्टर कर्मवीर शर्मा को सिटीजन्स सोशल फोरम ने दिया है।

अभी से पर्याप्त इंतजाम करना जरूरी: फोरम के संयोजक सच्चिदानंद शेकटकर ने सुझाव में कहा है कि आने वाले दिनों में कोरोना की भयावह स्थिति बने इसके पहले से ही पर्याप्त इंतजाम किया जाना जरूरी हो गया है। अस्थाई अस्पताल के लिए मदन महल स्थित विशाल शेड वाला दद्दा परिसर उपयुक्त रहेगा।

रेडक्रॉस सोसायटी को सौपे जिम्मा: फोरम में मांग की है कि अस्थाई अस्पताल का जिम्मा रेडक्रॉस सोसायटी को सौंपा जाना चाहिए ताकि जनसहयोग लिया जा सके। अस्थायी अस्पताल के लिए सबसे बडी़ जरूरत बिस्तरों की होगी।इसके लिए मेडिकल कालेज से लेकर विश्वविद्यालय तथा अन्य शिक्षण संस्थाओं के बंद पड़े छात्रावासों के पलंगों और बिस्तरों को दद्दा परिसर में लाया जाये। जरूरत पड़ने पर टेंट हाउसों से भी पलंग बिस्तर लिए जा सकते हैं।

पूरे संभाग का शहर पर दबाव : सिटीजन्स सोशल फोरम ने इस बात पर चिंता जाहिर की है कि जबलपुर के अस्पतालों पर जिले के साथ ही समीपी नरसिंहपुर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी, मंडला, दमोह जिले के कोरोना मरीजों के इलाज का जिम्मा है। इसलिए भी शहर में एक बड़े अस्थायी उपचार केंद्र बनाने की जरूरत है जिसे दद्दा परिसर में पूरा किया जा सकता है।