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मां अन्न्पूर्णा के दरबार में जरूरतमंदों को मिल रहा शिक्षा का दान

इंदौर। शहर के पश्चिम क्षेत्र स्थित अन्नपूर्णा मंदिर में जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा का दान दिया जाता है। इसके साथ गो शाला के जरिए गो-सेवा और संस्कृत महाविद्यालय में बटुकों को कर्मकांड की शिक्षा लाकडाउन से इतर हर दिन यहां माता के श्रृंगारित स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगता है। साथ ही मंदिर के जीर्णोद्धार की प्रक्रिया भी जारी है।

अन्नापूर्णा मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी श्याम सिंघल बताते है कि देवी अन्नणा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 650 बच्चों को नाम मात्रा शुल्क पर पढ़ाया जा रहा है। ये सभी बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते है। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा देकर मंदिर परिवार उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है। इसके साथ ही संस्कृत पाठशाला में हर साल 30 बच्चों को कर्मकांड की शिक्षा दी जाती है। इनके रहने-खाने के साथ सभी खर्च मंदिर ट्रस्ट उठाता है। इसके अलावा गोशाला में 50 गाए हैं। इनकी सेवा भी आश्रम परिवार द्वारा की जा रही है।

मंदिर का निर्माण 1959 में हुआ था। द्रविड स्थापत्य शैली में बना यह मंदिर तब से ही पश्चिम इंदौर की पहचान रहा है। मंदिर के मुख्य द्वार का निर्माण 1975 में किया गया था। मंदिर की तीन फीट ऊंची संगमरमर की मां अन्नापूर्णा की प्रतिमा भक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र है। यहां भगवान काशीनाथ की 14 फीट ऊंची प्रतिमा भी है। अब इस मंदिर निखारने का कार्य किया जा रहा है। अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर 20 करोड़ की लागत से मंदिर को नवीन स्वरूप दिया जा रहा है। अगले तीन साल में मंदिर के निर्माण का लक्षय रखा गया है। नए मंदिर की लंबाई 108 फीट और चौड़ाई 54 फीट होगी। मुख्य कलश की ऊंचाई 81 फीट रहेगी। मंदिर में कुल 50 स्तंभ रहेंगे। मंदिर का गर्भगृह, श्रृंगार का चौकी, परिक्रमा स्थल के साथ ही हाल का निर्माण भी किया जा रहा है।