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12 कोच की ट्रेन में बामुश्किल 15 से 20 यात्री आए नजर

बिलासपुर। बढ़ते संक्रमण का असर ट्रेनों पर नजर आने लगा है। हालत यह है कि मेमू पैसेंजर ट्रेनें पूरी खाली चल रही है। सोमवार को गोंदिया- झारसुगुडा मेमू स्पेशल ट्रेन का नजारा कुछ इसी तरह था। 12 कोच के इस ट्रेन की स्थिति यह थी कि बामुश्किल 15 से 20 यात्री सफर कर रहे थे। जोनल स्टेशन से मुश्किल से चार व पांच यात्री ही ट्रेन में सवार हुए। रेलवे को परिचालन से नुकसान भी हो रहा है। इसके बाद भी ट्रेनें चलाई जा रही है।

कोरोना वायरस का खतरा बढ़ गया है। लोग इतनी तेजी से चपेट में आ रहे हैं कि हर कोई दहशत में हैं। कुछ लापरवाह लोगों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर घर के अंदर ही है। यही वजह है कि ट्रेन में सफर करने से भी यात्री परहेज कर रहे हैं। हालांकि यात्रियों की कम संख्या की वजह से परिचालन प्रभावित नहीं हुआ है। सभी ट्रेनें समय पर और तय स्टेशनों में ठहर रही है।

एक्सप्रेस व सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेनों में तो यात्री नजर आ भी जा रहे हैं, लेकिन मेमू पैसेंजर स्पेशल ट्रेनों के लिए यात्री नहीं मिल रहे हैं। दोपहर को जब गोंदिया से झारसुगुड़ा जाने वाली ट्रेन प्लेटफार्म दो पर पहुंची तो नजारा देख यात्री व रेल अमला भी हैरान रह गया।

ट्रेन में यात्री ही नहीं थे। स्थिति यह थी कि किसी कोच में चार या पांच यात्री तो कोई पूरी तरह खाली थी। इसी स्थिति में ट्रेन गंतव्य के लिए रवाना भी हुई। रेल प्रशासन के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि बिना यात्री परिचालन से रेलवे को भारी नुकसान भी है।

पर परिचालन नहीं रोका जा सकता, क्योंकि यह अधिकार रेलवे बोर्ड के पास है। बोर्ड के आदेश पर ही करीब एक साल बाद ट्रेनें पटरी पर आईं है। हालांकि जिस समय परिचालन की घोषणा की गई स्थिति थोड़ी सामान्य थी। प्रारंभिक दौर में यात्री भी मिल रहे थे। लेकिन अब यात्रियों का टोटा हो गया है।

प्लेटफार्म में पसरा सन्नाटा

ट्रेन खाली और प्लेटफार्म पर सन्नाटा पसरा रहा है। अममून इस ट्रेन के पहुंचने से पहले ही प्लेटफार्म में इतनी भीड़ हो जाती है कि यात्रियों को पैर तक रखने की जगह नहीं मिलती। पर सोमवार को गिनते के यात्री नजर आए। दहशत ऐसी थी कि यात्री ट्रेन के पहुंचते ही सीधे कोच में चढ़ गए। यह स्थिति गोंदिया- झारसुगुड़ा की नहीं है। बिलासपुर से रायगढ़ , रायपुर व शहडोल के लिए छूटने वाली ट्रेनों की स्थिति भी कुछ इसी तरह है।