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गांवों में भी फैल रहा कोरोना, कई लोगों की जांच ही नहीं

इंदौर। कोरोना महामारी का संक्रमण केवल शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह गांवों तक भी पैर पसार चुका है। शहर से गांव और गांव से शहर आने वाले लोगों के कारण, बाजार में कामकाज के लिए आवाजाही के कारण अब संक्रमण हर कहीं फैल रहा है। पर इसके साथ एक समस्या यह भी है कि शहर के कारण गांवों की ओर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन का ध्यान नहीं है। गांवों में कोरोना की जांच भी ठीक से नहीं हो पा रही है। जो जागरूक ग्रामीण शहर आकर जांच कराना चाहते हैं, उनको जांच कराने में भी मुश्किल आ रही है। ऐसे में आपदा प्रबंधन समूह में शामिल कुछ जनप्रतिनिधियों की ओर से सुझाव आया है कि गांवों में मोबाइल लैब चलाकर ग्रामीणों का कोविड टेस्ट किया जाए।

इस मामले में शहर के पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे का कहना है कि गांव में कई लोग जांच कराने में संकोच भी करते हैं। मैंने प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट से आग्रह किया है कि मोबाइल लैब चलाकर गांवों में रैपिड एंटीजन टेस्ट किया जाए। इससे 15-20 मिनट में परिणाम पता चल जाएगा। इसका लाभ यह होगा कि पाजिटिव व्यक्ति को उसी समय दवा देकर घर पर आइसोलेट किया जा सकेगा। घर या परिवार में कोई एक व्यक्ति कोरोना पाजिटिव हुआ है तो वह वहीं तक सीमित रहेगा। परिवार या मोहल्ले के अन्य लोगों को इसका प्रभाव नहीं भुगतना पड़ेगा। इसलिए जांच से डरें नहीं, जांच कराएं। यदि खांसी, बुखार या हाथ-पैरों में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत जांच कराएं। जांच में पाजिटिव आने पर तत्काल दवा लेना शुरू कर दिया तो यह मरीज के लिए और उसके परिवार के लिए सुरक्षा कवच है। इस मामले में घबराने की आवश्यकता नहीं, तुरंत दवा लेना चाहिए। आपदा प्रबंधन समूह ने इस सुझाव पर अमल का निर्णय लिया है।