मां घर में सांसे गिन रही है और बेटा सांसों के लिए कतार में लगा है

इंदौर। 4 घंटे में ही सही ऑक्सीजन तो मिल रही है ना। घर में रखे सिलेंडर में कुछ देर की ऑक्सीजन बची है। मां सुनीता वहां सांसे गिन रही है। भाई विनोद के तीन बार फोन आ गए ’दादा कैसे भी हो ऑक्सीजन लेकर आना। वरना आज का दिन गुजारना मुश्किल हो जाएगा।’

देवास का रोहित सुबह 11 बजे से लाइन में लगा है फिर भी उसे जरा भी शिकायत नहीं कि ऑक्सीजन के लिए इतनी जद्दोजहद करना पड़ रही है। कुमेड़ी स्थित बीआरजे गैस प्लांट पर मौजूद कर्मचारियों ने रोहित को कतार में लगा दिया है और एक से डेढ़ घंटे बाद उसका नंबर भी आ जाएगा। रोहित की मां का ऑक्सीजनर लेवल 87 तक पहुंच चुका है। अस्पतालों में जगह नहीं इसलिए पास में रहने वाले एक नर्स की मदद से घर पर ही उपचार कर रहे है। उसे उम्मीद है समय पर ऑक्सीजन मिलती रही हो मां की सेहत सुधर जाएगी। उसके जैसे कईं नौजवान है जो चिलचिलाती धूप में खाली सिलेंडर में ऑक्सीजन भरवाने आए है। एमआर-10 टोल नाका से उतरते है स्कूटर,कार,पिकअप की स्पीड बता देती है कि सब ऑक्सीजन लेने जा रहे है। किसी को अस्पताल ने जवाब दे दिया तो किसी को घर पर ही ऑक्सीजन की जरुरत है।

महूनाका स्थित खालसा गैस प्लांट पर भी एसे दृश्य आम है। यहां आने वाला हर व्यक्ति भागते दौड़ता ही नजर आता है। उसके लिए एक-एक मिनट कीमती है। खाली सिलेंडर लेकर स्कूटर पर बैठे दिनेशसिंह के मुताबिक भाई संदीप की शुक्रवार को ही छुट्टी हुई है लेकिन ऑक्सीजन की जरुरत है। कर्मचारियों ने यह बोलकर लौटा दिया कि वह उनके यहां से जारी सिलेंडर ही रिफिल करेंगे। सफेद कुर्ते पहने एक सख्स हाथ में फोन लिए कार से उतरा और दरवाजे पर खड़े उस व्यक्ति से बात करवा कर सिलेंडर ले गया। ऑक्सीजन के लिए दौड़-भाग कर रहे लोगों मुताबिक प्रशासन को आम लोगों का भी ध्यान रखना चाहिए। नियम बनना चाहिए कि प्लांट पर आया हर व्यक्ति भरा सिलेंडर लेकर लौटे।