कोरोना को परिवार का साथ और अंदर से सकारात्मकता से हरा सकते हैं

26 सितंबर को मेरी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो मुझे थोड़ी घबराहट होने लगी। इसके बाद पत्नी और बेटी भी पॉजिटिव निकली। इसके बाद तो घबराहट और बढ़ गई। उस समय तो कोरोना होने से डर लग रहा थ। जैसे ही हम सभी पॉजिटिव निकले तो अस्पताल में भर्ती हो गए। मुझे शुगर, हाई बीपी और पत्नी को हाई बीपी था इसलिए परेशान ज्यादा हो रहे थे। बेटी भी हम दोनों के कारण घबरा गई थी। फिर हम तीनों ने अस्पताल में एक-दूसरे का ख्याल रखा। तीनों में पत्नी अंदर से मजबूत थी। उन्होंने हम लोगों को बहुत संभाला। इलाज कराकर घर पहुंचे तो हमारी और भी पुरानी बीमारियां उभर कर आ गईं। फिर ज्यादा परेशानी हुई। हालांकि इस बीमारी को परिवार का साथ और अंदर से सकारात्मकता से हरा सकते हैं। करीब डेढ़ माह तक सभी परेशान रहे, लेकिन पूरी तरह ठीक होने में दो माह का समय लगा।

हम लोगों में कोरोना का डर नहीं है। अगर अभी भी सावधानी बरतें तो कोरोना से बच सकते हैं। कोरोना से बचने के लिए अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए। बाहर निकले तो सुरक्षा का पूरा ख्याल रखें। मास्क और सैनिटाइजर का उपयोग करें। बाहर से आने के बाद भी पूरी तरह साफ-सफाई का ध्यान रखें। सकारात्मक सोचें और नकारात्मकता से बचें। ईश्वर से प्रार्थना करें, जो हमें संबल प्रदान करती है।

केपीएस तोमर, उप संचालक राज्य शिक्षा केंद्र