छत्तीसगढ़ में विधायक निधि में कटौती पर सियासी संग्राम

रायपुर।  छत्तीसगढ़ में सरकार ने कोरोना वैक्सीन (टीका) के लिए सभी विधायकों की विधायक निधि में कटौती कर दी है। सरकार ने दो करोड़ सालाना मिलने वाली विधायक निधि को वैक्सीन के लिए आरक्षित कर दिया है। कांग्रेस विधायकों ने सरकार के इस कदम का जहां स्वागत किया है, वहीं भाजपा विधायक विरोध में उतर गए हैं।

भाजपा विधायकों का कहना है कि अपने विधानसभा क्षेत्र के अस्पतालों में व्यवस्था सुधारने के लिए अब वे कहां जाएंगे और किससे राशि की मांग करेंगे। भाजपा के विरोध पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दो टूक कहा कि केंद्र सरकार ने जब सांसद निधि में कटौती की थी तो क्या सांसदों से पूछा था।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सरकार ने विधायक निधि को सामान्य प्रशासन विभाग के लिए आवंटित कर दिया है। योजना एवं सांख्यिकी विभाग के प्रमुख सचिव गौरव द्विवेदी ने आदेश जारी करके कहा कि विधायक निधि के 182 करोड़ रुपये को मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किया जाएगा। इससे हर विधानसभा में टीकाकरण का कार्य किया जाएगा।

इधर सरकार के फैसले के बाद भाजपा ने शराब पर लगाए गए सेस और डीएमएफ की राशि की सरकार को याद दिलाई। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने आबकारी मंत्री कवासी लखमा के उस जवाब को सार्वजनिक किया, जिसमें शराब के सेस की जानकारी दी गई है।

मंत्री लखमा ने विधानसभा में जानकारी दी थी कि देसी मदिरा पर दस रुपये प्रति बोतल सेस लगाया गया था, जिससे 198 करोड़ और विदेशी मदिरा की प्रति बोतल 10 फीसद सेस लगाया गया था, जिससे 166 करोड़ रुपये मिले। इसमें से 200 करोड़ रुपये प्रथम अनुपूरक बजट में सामान्य प्रशासन विभाग को कोरोना के खर्च के लिए आवंटित किया गया है।

चंद्राकर ने सवाल किया कि विधानसभा में छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार के इस उत्तर के बाद हम कैसे विश्वास कर सकते हैं कि राशि का उपयोग कोरोना की जंग में ही खर्च होंगे? पूरे प्रदेश का जन-गण कोरोना में सहयोग कर रहा है तथा भाजपा भी सहयोग कर रही है, लेकिन जिस तरीके से विधायक निधि को जबरदस्ती मुख्यमंत्री राहत कोष में भेजा गया, उसका विरोध करते हैं।

बजट के बाकी हिस्से को भी बिना विधानसभा जाए मुख्यमंत्री राहत कोष में परिवर्तित कर देना चाहिए, ताकि सिर्फ एक व्यक्ति मुख्यमंत्री को ही श्रेय मिल सके। भाजपा के आरोप पर पलटवार करते हुए संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने कहा कि टीकाकरण को लेकर राज्य सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है।

वैक्सीन के लिए कंपनियों को आर्डर भी दे दिया है। अब कंपनियों को वैक्सीन सप्लाई करना है। भाजपा नेताओं और सांसदों को राजनीति करना छोड़कर छत्तीसगढ़ के लोगों के हित में जल्द वैक्सीन मिले, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखना चाहिए।

विधायक निधि पर जनता का अधिकार: कौशिक

नेता प्रतिपक्षधरमलाल कौशिक ने कहा कि विधायक निधि किसी विधायक के लिए आरक्षित राशि नहीं है। यह क्षेत्र की जनता की राशि है। इस पर विधायक नहीं, जनता का अधिकार होता है। इस पैसे से विधायक अपने क्षेत्र में आक्सीजन, वेंटिलेटर और अस्पताल में अन्य सुविधाएं एकत्र कर रहे हैं। अब विधायकों की अनुशंसा का क्या होगा। कोरोना को परास्त करने के लिए सभी भाजपा विधायकों ने राशि दी है। उस राशि का इस्तेमाल कोरोना से बचाव में ही खर्च होना चाहिए। सरकार का निर्णय उचित नहीं है।

मोदी सरकार राज्यों को मुफ्त दे वैक्सीन: कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि कोरोना महामारी के खिलाफ मोदी सरकार एक राष्ट्र के रूप में नहीं लड़ रही है। देश के अलग-अलग राज्य अपने राज्यों की जनता को बचाने अपने स्तर पर जूझ रहे हैं। मोदी सरकार पूरे देश को केंद्र की तरफ से मुफ्त टीकाकरण करने की घोषणा करे। भारत को छोड़कर दुनिया के सारे देश की संघीय सरकार कोविड की लड़ाई लड़ रही है।

अमेरीका, ब्रिटेन, जर्मनी में वहां की संघीय सरकार ही टीकाकरण कर रही है। वैक्सीन निर्माता कंपनियों के द्वारा अलग-अलग मूल्य की घोषणा के बाद राज्य सरकारों के पुरजोर विरोध के बाद भी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने वैक्सीन के असंगत मूल्य और राज्यों को इसकी खेप कब और कैसे मिलेगी, इस पर आज तक एक शब्द भी नहीं कहा है। अगर केंद्र सरकार मुफ्त टीकाकरण करती तो किसी भी विधायक की निधि को राज्य सरकार को लेने की जरूरत नहीं पड़ती।