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पांच माह का ही बच्चा था उसके लिए भोपाल क्यों आएं, आप ही कर दो अंतिम संस्कार

भोपाल। कोरोना संक्रमण काल में मानवता तार-तार होते हुए नजर आ रही है। ऐसा इसलिए कि हमीदिया अस्पताल में भोपाल संभाग के सभी जिलों से कोरोना संक्रमित मरीज अपने परिजनों का इलाज कराने आ रहे है। इसमें पांच माह के मासूम से लेकर 80 साल के बुजुर्ग भी शामिल हैं। हैरत तो इस बात की है कि जब इन इलाजरत मरीजों की मौत हो रही है तो अपने ही अपनों को पहचानने तक से मना कर रहे हैं। इतना ही नहीं जो पहचानते हैं वे भी बेगाने हो रहे हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया है। ग्राम पथवोड़ा शाजापुर से भोपाल में रमेश प्रजापति अपने पोते और बेटे का इलाज कराने भोपाल आए थे। बेटा राहुल प्रजापति संक्रमण को हराकर ठीक हो गया, लेकिन पोते की हालात गंभीर थी। विगत 23 अप्रैल को बच्चे की मौत कोरोना संक्रमण के कारण हो गई। इसकी सूचना जब आयुष के दादा रमेश प्रजापति को दी गई तो उन्होंने बड़े ही रूंधे कंठ से जवाब दिया कि पांच महीने का ही था आयुष, आप ही उसका अंतिम संस्कार करवा दो। इसके लिए हम शाजापुर से भोपाल क्यों आएं।

प्रशासन आठ दिन बाद भी नहीं ले पाया निर्णय

नियमों के अनुसार जिला प्रशासन को हमीदिया में होने वाली मौत के बाद जिन लोगों के परिजन शव लेने नहीं आते हैं उन्हें कोविड प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार किया जाना होता है। इसके लिए जिला प्रशासन स्तर पर निर्णय होता है लेकिन पिछले आठ दिनों से हमीदिया में दो शव अंतिम संस्कार का इंतजार कर रहे हैं लेकिन अब तक इनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया। इधर, जानकारों का कहना है कि कोरोना संक्रमित मरीजों का शव तीन दिन में खराब होने लगता है लेकिन शहर में दो शव आठ दिनों से रखे हुए हैं और अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लिहाजा बीएमओ ने हाल ही में सीएमएचओ को पत्र लिखकर इस बात की सूचना दी है कि इनका अंतिम संस्कार किया जाना अब अत्यावश्यक हो गया है।