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एयरलिफ्ट करने पर 70 घंटे पहले मिल रही है राजधानीवासियों को संजीवनी

भोपाल। ऑक्‍सीजन संकट को दूर करने और लोगों तक जल्‍द से जल्‍द संजीवनी पहुंचाने को लेकर जिला प्रशासन की मुहीम रंग लाई है। ऑक्‍सीजन के खाली टैंकरों को एयर लिफ्ट कर पहुंचाने से एक तरफ का परिवहन में लगने काफी समय बच रहा है। इससे जल्‍द से जल्‍द ऑक्‍सीजन मरीजों तक पहुंचाने में काफी मदद मिल रही है। यहीं कारण है कि प्रशासन ने अब तक 13 ऑक्‍सीन के टैंकरों को एयरलिफ्ट कर परिवहन में लगने वाले 38 दिन का समय बचा लिया है। याने करीब 910 घंटे का समय बचा लिया है। अगर सडक मार्ग से ऑक्‍सीजन के टैंकर आते-जाते तो करीब 38 दिन का समय इन्‍हें आने-जाने में लग जाता। अपर कलेक्‍टर दिलीप यादव ने बताया कि एक टैंकर को एयर लिफ्ट कर ऑक्‍सीजन प्‍लांट तक पहुंचाने में 30 से 35 घंटे का समय बचाया जा रहा है। वहीं एयरलिफ्ट कर दो टैंकरों को एक साथ भेजा जा रहा है। इस तरह दो टैंकरों में लगने वाले 65 से 70 घंटे का समय बचाया जा रहा है। इससे भोपाल की जनता से जल्‍द से जल्‍द ऑक्‍सीजन की आपूर्ति हो पा रही है। शुक्रवार की सुबह भी दो ऑक्‍सीजन टैंकरों को एयर लिफ्ट कर रांची भेजा गया है। वहीं अब तक रांची, सूरत, जामनगर, बोकारो ऑक्‍सीजन प्‍लांट तक 13 टैंकरों को एयर लिफ्ट कर भेजा गया है। उन्‍होंने बताया कि एयरक्राफ्ट के जरिए खाली ऑक्‍सीजन टैंकर दो घंटे के अंदर ऑक्‍सीजन प्‍लांट तक पहुंच जाते है, जबकि सडक मार्ग या रेल मार्ग से जाने में उन्‍हें कम से कम 72 घंटे का समय लगता है। इधर, सेना के एयरक्राफ्ट सी-17 के द्वारा ऑक्‍सीजन के टैंकरों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है।

वर्जन

हम समय पर लोगों तक ऑक्‍सीजन पहुंचाने की हर संभव कोशिश कर रहे है। एयरलिफ्ट कर काफी समय बचाया जा रहा है। इससे जल्‍द से जल्‍द ऑक्‍सीजन पहुंचने में मदद मिल रही है। सभी के सहयोग और आपसी सामांजस्‍य से ऑक्‍सीजन की आपूर्ति की जा रही है।

अविनाश लवानिया, कलेक्‍टर, भोपाल