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राज्यों ने भी कोरोना से अनाथ हुए बच्चों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा कर बढ़ाया हाथ

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की तरह विभिन्न राज्यों ने भी कोरोना के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की है। इन राज्यों में तमिलनाडु, कर्नाटक, असम, त्रिपुरा, गुजरात, हरियाणा और उत्तर प्रदेश शामिल हैं।

तमिलनाडु: हर बच्चे को पांच लाख

तमिलनाडु सरकार सावधि जमा के रूप में हर बच्चे को पांच लाख रुपये देगी। 18 साल का होने पर ब्याज सहित पूरी रकम उसे दी जाएगी।

-ऐसे बच्चों को सरकारी घरों और छात्रावासों में प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का कहना है कि सरकार ऐसे सभी बच्चों का स्नातक तक पढ़ाई का खर्च वहन करेगी।

-अपने संबंधी या अभिभावक के साथ रहने वाले बच्चों को 18 साल तक प्रतिमाह 3,000 रुपये भत्ता प्रदान किया जाएगा।

-माता या पिता को खोने वाले बच्चों को तत्काल राहत के तौर पर तीन लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे।

असम : केयरटेकर को हर माह 3,500

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने घोषणा की कि सरकार अनाथ हुए प्रत्येक बच्चे के केयरटेकर या अभिभावक को प्रतिमाह 3,500 रुपये प्रदान करेगी। इसमें 2,000 रुपये केंद्र द्वारा वहन किए जाएंगे।

-जिन बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं होगा, उन्हें रिहायशी स्कूलों या संस्थानों में भेजा जाएगा और खर्च सरकार उठाएगी।

-विवाह योग्य लड़कियों को 10 ग्राम सोना और एकमुश्त 50 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे। छात्रों को लैपटाप या टेबलेट प्रदान किए जाएंगे।

कर्नाटक : 10वीं पास वालों को लैपटाप या टैबलेट

कोरोना से अनाथ बच्चों के केयरटेकर या अभिभावकों को कर्नाटक सरकार प्रतिमाह 3,500 रुपये प्रदान करेगी। -बिना अभिभावक वाले 10 साल से छोटे बच्चों को बाल देखभाल संस्थानों में रखा जाएगा जबकि 10 साल से बड़े बच्चों को रिहायशी स्कूलों में रखा जाएगा।

-10वीं पास कर चुके बच्चों को लैपटाप या टैबलेट प्रदान किया जाएगा।

-21 साल की उम्र पूरी चुकी लड़कियों को एक मुश्त एक लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे।

त्रिपुरा : लड़कियों को शादी के वक्त 50 हजार

अनाथ हुए बच्चों के अभिभावकों को त्रिपुरा सरकार ने भी 18 साल की उम्र होने तक 3,500 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की है।

-सरकारी बाल गृहों में रहने के इच्छुक बच्चों को सरकार मुफ्त शिक्षा उपलब्ध कराएगी और 10वीं पास करने पर लैपटाप या टेबलेट प्रदान करेगी।

-अनाथ लड़की को शादी के वक्त सरकार 50 हजार रुपये प्रदान करेगी।

गुजरात : हर महीने 4,000 रुपये की मदद

गुजरात सरकार 18 वर्ष की उम्र होने तक कोरोना से अनाथ हुए बच्चों को प्रतिमाह 4,000 रुपये प्रदान करेगी।

-अगर वे पढ़ाई जारी रखते हैं तो 21 वर्ष की आयु तक प्रतिमाह 6,000 रुपये प्रदान किए जाएंगे।

-ऐसे बच्चों को छात्रवृत्ति की सभी सरकारी योजनाओं और शिक्षा ऋण में प्राथमिकता दी जाएगी।

हरियाणा: बच्चों के नाथ बने मनोहर

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को योजना आरंभ करते हुए बताया कि जो अनाथ बच्चे स्वजन के साथ रहेंगे, उन्हें प्रति बच्चा 2,500 रुपये प्रति माह 18 साल तक दिए जाएंगे।

-जब यह बच्चे पढ़ाई शुरू करेंगे तो 18 साल तक उनको 12 हजार रुपये प्रति साल अन्य खर्चो के लिए दिए जाएंगे।

-जो बच्चे बाल देखभाल संस्थान में रहेंगे, 18 साल की आयु तक प्रति माह 1,500 रुपये इनके खातों में जमा जमा कराए जाएंगे। जब यह बच्चे 21 साल के होंगे तो उन्हें परिपक्वता राशि प्रदान की जाएगी।

-मुख्यमंत्री के अनुसार, कई किशोरियों को राज्य के 36 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ाई कराई जाएगी। इनके खाते में 51 हजार रुपये की राशि अभी डाली जाएगी। शादी के वक्त यह राशि ब्याज के साथ प्रदान की जाएगी।

-आठवीं से 12वीं या व्यवसायिक पाठ्यक्रम में पढ़ाई कर बच्चों को टैबलेट भी मिलेगा।

-केंद्र की ओर से भी ऐसे बच्चों को प्रधानमंत्री केयर फंड से 10 लाख रुपये की मदद मिलेगी। उम्र 23 साल होने पर 10 लाख रुपये की सहायता मिलेगी। -योजना का लाभ कोरोना की पहली व दूसरी लहर में अनाथ हुए बच्चों को दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश: देखभाल करने वाले को 4,000 प्रतिमाह

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार शाम ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ की घोषणा की। योजना में उन बच्चों को भी शामिल किया गया है, जिन्होंने माता-पिता में से आय अर्जित करने वाले अभिभावक को खो दिया है।

-सरकार अनाथ बच्चों की देखभाल के लिए केयर टेकर या अभिभावक को चार हजार रुपये प्रति माह प्रदान करेगी।

-दस वर्ष से कम उम्र के बच्चों को राजकीय बाल गृह (शिशु) में रखा जाएगा। ऐसे राजकीय बाल गृह मथुरा, लखनऊ, प्रयागराज, आगरा व रामपुर में संचालित हैं।

-अवयस्क बालिकाओं को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (आवासीय) में रखा जाएगा। 13 राजकीय बाल गृह (बालिका) में भी ऐसी बच्चियों को रखा जाएगा।

-अनाथ हुई बालिकाओं की शादी के लिए एक लाख एक हजार रुपये प्रदान करेगी। कोरोना के कारण अनाथ हुए करीब दो हजार बच्चे तलाशे जा चुके हैं। 200 बच्चे ऐसे हैं, जिन्होंने अपने माता-पिता दोनों को खो दिया है।

-सरकार मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ पाने के लिए दो लाख रुपये सालाना की आय सीमा निर्धारित कर सकती है। जिन बच्चों के माता-पिता दोनों गुजर गए हैं और वे अपने नजदीकी रिश्तेदार के यहां हैं, उन्हें आय की सीमा में नहीं बांधा जाएगा।

-रिश्तेदारों के यहां रह रहे बच्चों की सरकार नियमित निगरानी करेगी।