तीसरे दिन भी पानी को तरसा आधा शहर, कई क्षेत्रों में कम दवाब से हुआ जलपद्राय तो कुछ जगह शाम को होगा

भोपाल। रातापानी के जंगल में फूटी कोलार ग्रेविटी मुख्य लाइन भले ही करीब 41 घंटों के बाद सुधार ली गई हो, लेकिन आधा शहर लगातार तीसरे दिन पानी को लेकर तरसता रहा। शहर के करीब 60 फीसद हिस्से में सोमवार व मंगलवार को जलप्रदाय नहीं हो सका, जबकि बुधवार सुबह कुछ क्षेत्रों में पानी तो आया लेकिन बेहद कम दवाब के साथ। वहीं अधिकांश क्षेत्रों में शाम को जलप्रदाय होगा। इसलिए लोग पूरे दिन पानी को लेकर परेशान होते रहे। निजी जल संसाधनों से वे पानी जुटाते हुए नजर आए।

रविवार रात एक बजे पाइप लाइन फूटी थी, जो मंगलवार शाम को ही सुधारी जा सकी थी। रात में टंकियां भरने का काम तो चला, लेकिन दवाब उतना नहीं था, जितना जरूरी होता है। इस कारण शहर के अधिकांश हिस्से में सुबह पानी की समुचित सप्लाई नहीं हो पाई। बता दें कि कोलार लाइन से जोन क्रमांक-छह, सात एवं नौ के क्षेत्रों के अलावा चार इमली, कोलार, शाहपुरा, तुलसी नगर, न्यू मार्केट, एमपी नगर, बिट्टन मार्केट, 10 नंबर मार्केट, अरेरा कॉलोनी, हबीबगंज, गुलमोहर, रेलवे कॉलोनी, जवाहर चौक, नेहरू नगर, टीटी नगर, कोटरा सुल्तानाबाद, बुधवारा, निशातपुरा, नादरा बस स्टैंड, 1100 क्‍वार्टर्स, पंचशील नगर, आदि क्षेत्र जुड़े हैं। कुछ क्षेत्रों में बुधवार सुबह जलप्रदाय किया गया, किंतु दवाब कम रहा। वहीं अधिकांश क्षेत्रों में शाम को जलप्रदाय होगा।

30 साल पुरानी हो चुकी कोलार लाइन, नई बिछाई जा रही, लेकिन उसे ही चार साल बीते

कोलार लाइन से शहर के 60 फीसद हिस्से में जलप्रदाय किया जाता है, लेकिन पिछले कुछ महीने से लाइन में लीकेज होने से शहरवासियों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ता है। उक्त लाइन करीब 30 साल पुरानी है। इस कारण अधिक दवाब पड़ने से लीकेज हो जाती है। हालांकि, करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से नई कोलार ग्रेविटी लाइन बिछाई जा रही है, किंतु उसका काम चार साल से चल रहा है, जो अब भी अधूरा है। यदि यह काम पूरा हो जाता है, तो नई लाइन से ही पानी आएगी। इससे लोगों को पानी के लिए नहीं तरसना पड़ेगा।