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हमेशा पड़ोसियों से लड़ने वाले परिवार के जीवन में आई बहार

ग्वालियर। कला प्रेमियों को मनोरंजन देने के लिए आर्टिस्ट कंबाइन निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में मंगलवार को चैतन्य मराठी भाषिक मंडल के सहयोग से सौजन्याची ऐंशी तैशी नाटक की आनलाइन प्रस्तुति दी। जिसका प्रसारण इंटरनेट मीडिया पर किया गया। नाटक को वसंत सबनीस ने लिखा है, जबकि निर्देशक पद्मजा वडालकर हैं। इस नाटक की कहानी मुंबई के पुराने चाल में रहने वाले लोगों की जीवनशैली को दर्शाती है।

एक चाली में बेरके नाम का परिवार रहता है। जिसके मुखीया का नाम नाना है। उनकी पत्नी एक बेटा और बेटी चार लोगों का परिवार है। ये पूरा परिवार बड़ा ही लड़ाकू किस्म का है। किसी से सीधे मुंह बात करना तो जानता ही नहीं है। सुबह होने के साथ इनका झगड़ा पड़ोसियों से शुरू हो जाता है। उनके पड़ोस में मंडलेकर और देसाई रहते हैं। एक पारो नाम की युवती भी रहती है। इन तीनों से नानाजी के परिवार का हमेशा झगड़ा होता है। नाना बेरके का सदाशिव भाऊ नामक एक दोस्त है, जो इनके भले की सोचता है। नानाजी की बेटी की शादी के लिए सदाशिव भाऊ लड़का लाते हैं, मगर उन्हें वो पसंद नहीं आता और उसे भगा देते हैं। आगे चलकर पुलिस की शिकायत होती है। उसके बाद ये परिवार बड़े ही शांति से रहने की कसम लेता है। थोडे दिन शांति पूर्ण वातावरण रहता है। पारो की बेटी से नानाजी का बेटा पक्या शादी करता है। ये देखकर पारो लड़ने आती है, पर अब उसकी बेटी भी इस परिवार के रंग में रंग जाती है। उसका झगड़ा मां से होता है, मगर जैसे-तैसे मामला शांत हो जाता है। अंत में ये परिवार सौजन्य याने प्यार अपना सब भूलकर सौजन्याची ऐंशी तैशी बोलता है। नाटक में अभिनय गौरी पटवर्धन, अर्जुन केलकर, नितल कानडे जोग, सुधीर पटवर्धन, निलीमा पालकर, सुप्रिया गोसावी, प्राजक्ता गोसावी, प्रफुल्ल बाकरे, राजेंद्र लुकतुके, राजेश माथने और मिलिंद बोडस ने किया।