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कोरोना-मुक्‍ति की कामना से कृष्‍णागिरी में होने वाले महायज्ञ के लिए भोपाल से जाएगी अनुष्ठान सामग्री

भोपाल। देश-दुनिया पर आई कोरोना महामारी आपदा के निवारण के लिए जन-कल्याण की पुनीत भावना के साथ तमिलनाडु के कृष्णागिरी में सदी के सबसे बड़े महायज्ञ का आयोजन 14 जुलाई से 23 जुलाई तक रखा गया है। पिछले एक वर्ष से अपना देश घोर विपत्तियों का सामना कर रहा है और अब इन विपत्तियों ने विकराल रूप धारण कर लिया है। इनसे मुक्ति के लिए सरकार से लेकर आम जनता सभी लोग प्रयास कर रहे हैं। हम सभी चाहते है कि देश समृद्ध, सुरक्षित और स्वस्थ बने, देश के वातावरण में फैली अशुद्धियां समाप्त हो और भारतवासी शांति से अपना जीवन-यापन कर सके। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु राष्ट्रसंत वसंत विजय जी महाराज के पावन सान्निध्य में श्री विश्वशांति एवं महालक्ष्मी कुबेर अर्थ धर्म समृद्धि कलश अनुष्ठान किया जा रहा है।

श्री कृष्णागिरी पार्श्व पद्मावती सेवा मंडल भोपाल के अनिल लुणावत ने बताया की जनभागीदारी से होने वाले इस इस महायज्ञ में लगभग 10 हजार किलो सफेद चन्दन, लाल चन्दन, पीला चन्दन, 50 किलो से अधिक केसर, देवदारु, अगर, तगर, आम्र की लकड़ियां, 10 हजार किलो विभिन्न औषधियां और उो हजार किलो गाय का शुद्ध देसी घी की आहुतियां दी जाएंगी। इस महाअनुष्ठान में भोपाल से अनुष्ठान सामग्री के साथ सैकड़ों की संख्या में भक्त भी पहुंचेंगे। चेन्नई से 265 एवं बेंगलुरु से 90 किलोमीटर दूरी पर स्थित मां पद्मावती की दिव्य कृपा एवं ऊर्जा से ओत-प्रोत “श्री पार्श्व पद्मावती शक्तिपीठ तीर्थधाम” पर 40,000 वर्गफुट के विशाल यज्ञमंडप में 108 प्रकाण्ड पण्डित द्वारा यह महाअनुष्ठान संपन्‍न किया जाएगा। जीवन को सुख, समृद्ध, स्वास्थ्य और सुरक्षा से भरने के लिए अति विशाल माँ महालक्ष्मी जी की प्रतिमा के समक्ष पीतल के पान व नारियल युक्त पीतल के बने छह लीटर के 5000 कुंभ अभिमंत्रित किए जाएंगे। घर को स्वर्ग बनाने वाले इन दिव्य कलशों को महालक्ष्मी कुबेर मंत्रों से एक करोड़ कुमकुम पूजन, 10 लाख हवन आहुतियों और 25 लाख धन्वंतरि कुबेर जाप के साथ सिद्ध किया जाएगा। इन दिव्य कलशों में 170 दुर्लभ औषधियां, विभिन्न इत्र, नवरत्न, 32 प्रकार के उपरत्न, 32 प्रकार के हीलिंग जेमस्टोन्स और भारत के 106 वैष्णव दिव्य क्षेत्र, जहाँ भगवान नारायण और मां लक्ष्मी प्रत्यक्ष विराजमान हैं, ऐसे तीर्थों में लक्ष्मी मां के चरणों में पूजित अभिमंत्रित अति-विशिष्ट कुंकुम को सभी कलशों में भरा जाएगा।