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बिजली बिल जमा करने के लिए मुख्य सचिव ने लिखा विभाग प्रमुखों को पत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी (सीएसपीडीसीएल) पर बढ़ते लेनदारी के बोझ ने सरकार को भी चिंता में डाल दिया है। अकेले सरकारी विभागों पर करीब 800 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। वहीं एक-एक लाख रुपये से अधिक बकायेदार उद्योगों की संख्या करीब 11 सौ से अधिक है।

कंपनी के राजस्व में कमी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इसे देखते हुए मुख्य सचिव अमिताभ जैन को हस्तक्षेप करना पड़ा है। मुख्य सचिव ने विभाग प्रमुखों को पत्र लिखकर बिजली बिल का बकाया शीघ्र अदा करने के लिए कहा है।

ऊर्जा विभाग के अफसरों के अनुसार करीब महीनेभर पहले मुख्य सचिव जैन ने विभाग और बिजली कंपनी के अफसरों की बैठक लेकर बकाया वसूली में तेजी लाने का निर्देश दिए थे। सूत्रों के अनुसार इस दौरान कंपनी के अफसरों ने सरकारी विभागों पर बकाया वसूली में कठिनाई की जानकारी मुख्य सचिव को दी थी। इसके बाद मुख्य सचिव ने पहल करते हुए विभाग प्रमुखों को पत्र लिखा है। सीएस की तरफ से विभाग प्रमुखों को लिखे दो पत्र नईदुनिया के पास भी है।

कंपनी सूत्रों के अनुसार बिलासपुर वृत्त के अंतर्गत आने वाले सरकारी विभागों पर 8278.5 लाख का बिजली बिल बकाया है। दूसरे नंबर पर रायपुर नगर वृत्त है। इस वृत्त में सरकारी विभागों पर 7788.5 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया है। तीसरे नंबर पर दुर्ग वृत्त है, जहां 7569.5 लाख का बकाया है। बिलासपुर नगर वृत्त में शामिल सरकारी विभागों पर 5514.5 लाख बकाया है।

वितरण हानि 16.53 फीसद करने का लक्ष्य

मुख्य सचिव ने विभाग प्रमुखों को लिखे पत्र में बताया है कि प्रदेश में लाइन लास 16.53 फीसद तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, कंपनी इसे आठ फीसद करने की बात कह रही है। कंपनी प्रबंधन ने 17 नवंबर 20 को अपने मैदानी अमले को पत्र लिखकर लाइन लास आठ फीसद या उससे कम करने का लक्ष्य दिया है। कंपनी के इंजीनियरों के अनुसार आठ फीसद का यह लक्ष्य वास्तविकता और तकनीकी रूप से सही नहीं है। इस काल्पनिक कार्य में वितरण कंपनी ने सभी मैदानी अधिकारियों को लगा दिया गया है, इससे बकाया वसूली समेत अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं।