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2020 में हार गए थे रानिल विक्रमसिंघे चुनाव, अब बने श्रीलंका के प्रधानमंत्री

श्रीलंका में बढ़ते गंभीर आर्थिक संकट के बीच पूर्व प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को एक बार फिर गुरुवार को अगले प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। इसके पहले विक्रमसिंघे ने 4 बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया है। अक्टूबर 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना ने उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटा दिया था। 2 महीने बाद सिरिसेना ने उन्हें फिर से प्रधानमंत्री के रूप में पुनः स्थापित किया था। रनिल विक्रमसिंघे यूनाइटेड नेशनल पार्टी की राष्ट्रीय सूची से संसद सदस्य हैं। वह 1994 से यूनाइटेड नेशनल पार्टी के नेता हैं। इससे पहले उन्होंने 1993 से 1994, 2001 से 2004, 2015 से 2018 और 2018 से 2019 तक श्रीलंका के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था। वहीं, 1994 से 2001 तक और 2004 से 2015 तक विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने काम किया है।

एक धनी और राजनीतिक परिवार में जन्मे रानिल विक्रमसिंघे ने सीलोन विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और 1972 में सीलोन ला कालेज से एक वकील के रूप में योग्यता प्राप्त की। यूनाइटेड नेशनल पार्टी के साथ 1970 के दशक के मध्य में सक्रिय राजनीति में प्रवेश करते हुए, वे पहली बार बियागामा से संसद के लिए चुने गए। उन्हें उनके चाचा राष्ट्रपति जे.आर. जयवर्धने द्वारा विदेश मामलों का उप-मंत्री नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्हें युवा मामलों और रोजगार मंत्री नियुक्त किया गया, जो श्रीलंका में सबसे कम उम्र के कैबिनेट मंत्री बने। इसके बाद 1989 में राष्ट्रपति रणसिंघे प्रेमदासा ने विक्रमसिंघे को उद्योग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री और सदन के नेता के रूप में नियुक्त किया। 1994 के राष्ट्रपति चुनाव के अभियान के दौरान गामिनी दिसानायके की हत्या के बाद नवंबर 1994 में उन्हें विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था।