कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, यात्रियों को हो रही भारी परेशानी

बेंगलुरु। कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) के कर्मचारियों के वेतन में संशोधन की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने के कारण बुधवार को बेंगलुरु में बस सेवाएं प्रभावित हुईं और इससे यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है। KSRTC ने यात्रियों की सुविधा के लिए निजी बसों को अस्थायी परमिट जारी किए हैं।

केएसआरटीसी के डिवीजन कंट्रोलर नागराज ने कहा, ‘आरटीओ के संयुक्त आयुक्त ने आज सुबह आकर सभी निजी ऑपरेटरों से संपर्क किया। उन्होंने लोगों को लाने-ले जाने की व्यवस्था की है। हम जनता को अच्छी सेवा देने के लिए तत्पर हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि हम निजी सेवाओं का उपयोग कर लोगों को परिवहन के लिए सुबह से संघर्ष कर रहे हैं। इस हड़ताल से प्रभावित होने वाले लोगों के परिवहन के लिए टेक्सीकैब का इस्तेमाल बाद में किया जाएगा

उन्होंने कहा कि कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे। हम उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन वे बस सेवा संचालित करने के इच्छुक नहीं हैं। एक छात्र सौम्या ने कहा, ‘अब हमें मेट्रो सेवाएं लेनी होंगी क्योंकि हमें कॉलेज तक ले जाने के लिए परिवहन का कोई अन्य साधन नहीं है। हमारी परीक्षाएं हैं, अगर हम परीक्षा नहीं देते हैं तो हम असफल हो जाएंगे। कॉलेज प्रशासन ने परीक्षाएं स्थगित नहीं की हैं। उन्होंने हमें बताया कि यह हमारी समस्या है कि कॉलेज तक कैसे पहुंचा जाए, उन्होंने हमें मेट्रो या ऑटोरिक्शा का उपयोग करने के लिए कहा।’

उन्होंने आगे कहा कि कॉलेज के लंबे बंद के बाद हमारी पढ़ाई और कक्षाएं वापस पटरी पर आ रही हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्हें हमारे भविष्य की चिंता नहीं है। चिकित्सा उपचार के लिए बेंगलुरु आए रिजवा ने कहा, ‘मैं एक ऑटोरिक्शा की प्रतीक्षा कर रहा हूं। कोई और रास्ता नहीं है।’

बिहार के संतोष ने कहा, ‘हम विरोध के बारे में नहीं जानते थे। अब मैं यहां फंस गया हूं, मैं मदद के लिए एक दोस्त को बुला रहा हूं।’ बता दें कि केएसआरटीसी कर्मचारियों ने निम्नलिखित मांगों के साथ हड़ताल का आह्वान किया है: वेतन वृद्धि, स्थायी नौकरी, वेतन और शिफ्ट। कर्मचारी विभाग में संविदा कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं।

परिवहन मंत्री, राज्य के उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के साथ परिवहन संघ और संगठन के साथ पहले भी कई बैठकें हुईं, लेकिन कुछ भी निर्णय नहीं निकल सका।