कांग्रेस की सत्ता वापसी में कस्र्णा की थी बड़ी भूमिका

बिलासपुर। Bilaspur News: ओजस्वी भाषण, आंकड़ों के आधार पर बात करना और अपनी वाकपटुता के सहारे समर्थकों और विरोधियों को बांधे रखने की क्षमता को लेकर भारतीय राजनीति में छत्तीसगढ़ की किसी महिला नेत्री का जब भी जिक्र होगा कस्र्णा शुक्ला का नाम शीर्ष पर रहेगा। ओजस्वी वक्ता और प्रतिकूल राजनीतिक परिस्थितियों में अपने आपको स्थापित करना और पार्टी के लिए अनुकूल रास्ता बनाना कोई कस्र्णा से सीखे।

वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देकर कांग्रेस में आईं। उनका कांग्रेस में आना छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से शुभ रहा। चुनाव के ठीक पहले भाजपा की तर्ज पर कांग्रेस में बूथ कमेटियों का गठन करना और प्रशिक्षण शिविर के जरिए कार्यकर्ताओं को संगठित करने का काम किया। कस्र्णा के बताए रास्ते के जरिए कांग्रेस का प्रदेश में 15 साल का राजनीतिक वनवास खत्म हुआ और सत्ता में जोरदार तरीके से वापसी हुई।

भाजपाई व कांग्रेसी दिग्गज इस बात को खुलकर कहते हैं कि दीदी जिस पार्टी में रहीं बेहद ईमानदारी के साथ।

पूर्व प्रधानमंत्री व भारत रत्न स्व अटलबिहारी वाजपेयी की भतीजी भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा की पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,पूर्व सांसद,पूर्व विधायक कस्र्णा शुक्ला नहीं रहीं। कोरोना ने एक और दिग्गज नेता को हमेशा, स्वजनों, पार्टी के कार्यकर्ताओं से छीन लिया है। लंबे अरसे तक प्रदेश और देश में भाजपा की राजनीति करने वाली कस्र्णा का मन वर्ष 2013 में बदला और भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर लीं।

छत्तीसगढ़ की राजनीति खासकर छग प्रदेश कांग्रेस कमेटी,प्रदेश के दिग्गज नेताओं और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के लिए कस्र्णा का कांग्रेस प्रवेश शुभ रहा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन महामंत्री व वर्तमान में पीसीसी के उपाध्यक्ष अटल श्रीवास्तव बताते हैं कि वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले जब कस्र्णा दीदी कांग्रेस में आईं उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस में कैडर नहीं है। कैडरबेस पार्टी बनाओ। बूथ कमेटी का गठन होना चाहिए। कार्यकर्ताआंे को रिचार्ज करने दिग्गजों को बूथ स्तर तक जाना होगा।

उनकी सोच स्पष्ट थी। संगठन और कार्यकर्ताओं के दम पर राज्य की सत्ता पर वापसी। यही उनका मूलमंत्र था। उनके सुझाव पर काम हुआ। परिणाम हम सबके सामने है। राज्य की सत्ता में वापसी के पीछे उनकी भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। उनका दृष्टिकोण स्पष्ट था। संगठन को मजबूत करने आखिरी सांस तक काम करती रहीं। तर्क शक्ति इतनी कि उनकी बातों को काटना या फिर तर्क के साथ पेश करने की हिम्मत कोई जुटा नहीं पाते थे। अपनी बातों को तार्किक और प्रभावी ढंग से पेश करती थीं। स्पष्टवादी थी। जब भाजपा में थी तो पूरी ईमानदारी के साथ और जब कांग्रेस में आई तो उसी दृढ़ता के साथ काम करतीं रहीं। राजनीति उनके लिए मिशन था।

बिलासपुर से रहा गहरा नाता

कस्र्णा शुक्ला का बिलासपुर जिला व संभाग की राजनीति से गहरा नाता रहा है। राज्य की सत्ता पर वापसी के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित दिग्गज कांग्रेसी नेताओं ने बिलासपुर लोकसभा की जिम्मेदारी एक तरह से कस्र्णा पर छोड़ दिया था। संगठन में नियुक्तियों से लेकर नगरीय निकाय और जिला पंचायत चुनाव में टिकट वितरण में उनकी बातों को बराबर महत्व मिला।

संगठन में उनकी पसंद को तव्वजो भी मिली। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के लिए पीसीसी ने कस्र्णा शुक्ला को बतौर पर्यवेक्षक जिम्मेदारी सौंपी थी। 14 फरवरी को महापौर निवास में जिला पंचायत के सदस्यों की मीटिंग ली। एक-एक से बंद कमरे में रायशुमारी की। रायशुमारी के बाद अस्र्ण सिंह चौहान के नाम की अध्यक्ष पद के लिए घोषणा की।

आखिरी बार मरवाही उपचुनाव में हुईं शामिल

कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला बताते हैं कि मरवाही विधानसभा उपचुनाव में दानीकुंडी जोन कार्यालय में राज्यसभा सदस्य छाया वर्मा के साथ दीदी पहुंची थी। दानीकुंडी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में चुनावी सभाओं को संबोधित करने के बाद कार्यकर्ताओं की बैठक में शामिल हुईं और रायपुर के लिए रवाना हो गईं।

संस्मरण सुनाते रो पड़े करीबी नेता

पूर्व सांसद प्रतिनिधि राजकुमार सिंह बताते हैं कि दीदी से पार्टी के बजाय भावनात्मक और पारिवारिक रिश्ता रहा है। उनके घर के हर एक कार्यक्रम में परिवार के सदस्य की तरह शामिल होेती रही हैं। आखिरी बार 14 फरवरी 2020 को आईं थी। जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के बाद रायपुर जाते वक्त तिफरा स्थित निवास में स्र्की। चाय पीं और जस्र्री चर्चा के बाद रायपुर के लिए रवाना हो गईं।

राजकुमार बताते हैंकि जब वे भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष थी तब उनके नेतृत्व में वर्ष 2011 में जयपुर में राष्ट्रीय महिला मोर्चा सम्मेलन हुआ था। तब देश के सभी प्रांतों से महिलाएं अपनी वेशभूषा में सम्मेलन स्थल पहुंची थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज व पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने तब जमकर तारीफ की थी। दोनों नेताओं ने कहा कि यहां तो हिन्दुस्तान नजर आ रहा है। अद्भूत नजारा था।

अपने आपको जूनियर कार्यकर्ता मानती थी

पीसीसी के महामंत्री अर्जुन तिवारी ने कहा कि वे अपने आपको कांग्रेस की सबसे जूनियर कार्यकर्ता मानती थी। यही कारण है कि छोटे कार्यकर्ताओं का भी मन से सम्मान करती थी। विपरीत परिस्थितियों से कभी घबराती नहीं थी। दृढ़ इच्छाश्ाक्ति के साथ ही स्पष्टवादी थी। निश्छल मन की थी दीदी। सभी से समान रूप से व्यवहार करती थी।